उत्तराखंड में गांवों के पुनर्वास पर सरकार अब तक 61.02 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है

उत्तराखंड में बादल फटने और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से अक्सर पूरा का पूरा गाँव मटियामेट हो जाता है.

देहरादून : उत्तराखंड में बादल फटने और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से अक्सर पूरा का पूरा गाँव मटियामेट हो जाता है. .पिछले कुछ सालों में ही प्रकृति ने 83 से ज्यादा गांवों को उजाड़ दिया था । पिछले साढ़े चार साल में प्रदेश सरकार ने इन गांवों के 1447 परिवारों का सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास किया है । इन गांवों के पुनर्वास पर सरकार अब तक 61.02 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है।

यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सामने आई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा के लिहाज से संवेदनशील गांवों के पुनर्वास के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।

बता दें कि राज्य में आपदा के कारण प्रभावित हुए 400 से अधिक गांव चिन्हित किए गए हैं। सरकार पहले चरण में अत्यधिक प्रभावित और संवेदनशील गांवों का पुनर्वास कर रही है। बताया गया कि 2011 में आपदा के उपरांत प्रभावित गांवों व परिवारों की पुनर्वास नीति के तहत वर्ष 2017 से पहले केवल दो गांवों के 11 परिवारों का पुनर्वास हुआ था।

वर्ष 2017 के बाद से 81 गांवों के 1436 परिवारों को पुनर्वासित किया गया। गढ़वाल मंडल के चमोली जिले के 15 गांवों के 279 परिवार, उत्तरकाशी जनपद के पांच गावों के 205 परिवार, टिहरी जिले के 10 गांवों के 429 परिवार एवं रूद्रप्रयाग जनपद के 10 गांवों के 136 परिवार पुनर्वासित किए गए।

जबकि कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ के 31 गांवों के 321 परिवार, बागेश्वर जिले के नौ गांवों के 68 परिवार, नैनीताल जिले के एक गांव के एक परिवार एवं अल्मोड़ा जिले के दो गांवों के आठ परिवार विस्थापित किए गए। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरूगेशन व वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

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