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Up kiran,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका इस रणनीतिक सैन्य बेस की सुरक्षा को किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने देगा। अगर भविष्य में कोई समझौता टूटता है या अमेरिकी सेना की मौजूदगी पर खतरा मंडराता है, तो वे सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।

ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दिया। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से सीधी बातचीत हुई है। ट्रंप के मुताबिक, हिंद महासागर के बीच स्थित डिएगो गार्सिया बेस अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है और बीते एक साल में कई अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन इसी बेस की रणनीतिक स्थिति के कारण सफल हो पाए हैं।

लीज डील पर क्या बोले ट्रंप?

ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच डिएगो गार्सिया को लेकर हुए लीज समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि वे प्रधानमंत्री स्टार्मर की स्थिति को समझते हैं। उनके अनुसार, उस समय की परिस्थितियों में की गई डील शायद सबसे बेहतर रही हो। हालांकि, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर भविष्य में यह समझौता कमजोर पड़ता है या बेस की सुरक्षा पर कोई खतरा आता है, तो अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए सैन्य कदम उठाने से नहीं झिझकेगा।

ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर उठ रहे सवालों को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने लिखा कि किसी भी तरह के झूठे दावे या पर्यावरण से जुड़े तर्कों के नाम पर इस महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

व्हाइट हाउस का समर्थन

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी राष्ट्रपति के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बीच इस विषय पर सीधी बातचीत हुई है और अमेरिका जरूरत पड़ने पर दुनिया के किसी भी हिस्से में, जिसमें डिएगो गार्सिया भी शामिल है, अपनी संपत्ति और सैन्य हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने का अधिकार रखता है।

क्यों अहम है डिएगो गार्सिया?

डिएगो गार्सिया अमेरिका के सबसे अहम विदेशी सैन्य ठिकानों में गिना जाता है। यह बेस मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए एक प्रमुख केंद्र की भूमिका निभाता है। साथ ही, यह द्वीप लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक बहसों का भी विषय बना हुआ है। फिलहाल अमेरिका की ओर से लीज समझौते या भविष्य की रणनीति को लेकर कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।