31 डॉक्टर और 30 आशा वर्कर की जाएगी नौकरी, बाराबंकी में बड़ा एक्शन, सरकारी नौकरी पर काट रहे थे मौज
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य और प्रशासनिक महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बाराबंकी जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और कड़े एक्शन की खबर सामने आई। सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC/PHC) में तैनात रहकर अपनी चिकित्सीय जिम्मेदारियों से लगातार नदारद रहने वाले और सरकारी वेतन का लाभ उठाकर घर बैठे मौज काटने वाले लापरवाह चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ प्रशासन ने आखिरकार बड़ा हंटर चला दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और जिला प्रशासन की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर जिले के कुल 31 डॉक्टरों और लगभग 30 आशा कार्यकर्ताओं (ASHA Workers) को सेवा से बर्खास्त करने या उनकी संविदा समाप्त करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और मरीजों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए की गई इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य कर्मियों और लापरवाह कर्मचारियों में भारी खलबली मच गई है।
बिना सूचना के महीनों से गायब चल रहे थे डॉक्टर, कागजों पर चल रहा था अस्पताल का खेल
स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई इस उच्चस्तरीय जांच में जो खुलासे सामने आए हैं, वे बेहद हैरान करने वाले हैं। कई डॉक्टर ऐसे पाए गए जो बिना किसी आधिकारिक अनुमति, बिना किसी लीव एप्लीकेशन के महीनों और कुछ मामलों में तो सालों से अपने निर्धारित जिला अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों से गायब चल रहे थे। हैरानी की बात तो यह है कि वे अस्पताल में अपनी उपस्थिति दर्ज न कराने के बावजूद हर महीने सरकार से पूरा वेतन और अन्य भत्ते वसूल रहे थे। ग्रामीण अंचल के गरीब मरीज जब इलाज की आस में इन सरकारी अस्पतालों में पहुंचते थे, तो उन्हें ताले लटके मिलते थे या फिर जूनियर स्टाफ के भरोसे अस्पताल चलता हुआ मिलता था। स्थानीय लोगों की बार-बार मिल रही शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स का संज्ञान लेते हुए जब जिला प्रशासन ने इन सभी मामलों की गोपनीय जांच कराई, तो इन सभी 31 डॉक्टरों की पोल खुलकर सामने आ गई, जिसके बाद यह कठोर कदम उठाया गया है।
30 आशा वर्कर भी रडार पर, मानदेय लेने के बावजूद जमीनी कार्य से नदारद रहने का आरोप
केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली जमीनी स्तर की लगभग 30 आशा वर्कर (ASHA Workers) भी इस कार्रवाई की जद में आ चुकी हैं। जांच में यह पाया गया कि ये आशा वर्कर न तो गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण और संस्थागत प्रसव के लिए कोई कार्य कर रही थीं और न ही शासन द्वारा चलाई जा रही किसी भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना में अपनी कोई रुचि दिखा रही थीं। इसके बावजूद वे कागजों में अपनी फर्जी रिपोर्ट तैयार करके मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान लगातार प्राप्त कर रही थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी जिन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की थी, वे जब अपनी ड्यूटी से पूरी तरह नदारद मिलेंगी, तो सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाएं कैसे सफल होंगी? इसी बात को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इन सभी 30 आशा वर्कर्स को भी बर्खास्त करने का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है।
स्थानीय जनता और मरीजों ने फैसले का किया स्वागत, भविष्य में भी जारी रहेगी औचक निरीक्षण की प्रक्रिया
बाराबंकी जिले के इस बड़े प्रशासनिक एक्शन की गूंज पूरे उत्तर प्रदेश में सुनाई दे रही है। स्थानीय आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मरीजों के तीखे संघर्ष के बाद प्रशासन ने यह कड़ा संदेश देने का काम किया है कि अब सरकारी नौकरी का मतलब जिम्मेदारी से भागना नहीं होगा। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जनता के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ सबसे संवेदनशील क्षेत्र है, और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में बाराबंकी के सभी ग्रामीण और शहरी इलाकों के अस्पतालों में औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) का यह सिलसिला और अधिक तेजी से चलाया जाएगा ताकि कोई भी कर्मचारी अपनी ड्यूटी से भागने की हिम्मत न कर सके।
निष्कर्ष: लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कड़ी चेतावनी बना बाराबंकी का यह एक्शन
संक्षेप में कहें तो बाराबंकी जिले में 31 डॉक्टरों और 30 आशा वर्कर्स के खिलाफ की गई यह बर्खास्तगी की कार्रवाई लापरवाह और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी और स्पष्ट चेतावनी है। यह कदम यह साबित करता है कि यदि सरकारी तंत्र अपनी जिम्मेदारी सही से निभाए, तो आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और न्याय दोनों मिल सकते हैं।