KGMU के कई डॉक्टरों और प्रोफेसरों पर गिरेगी गाज? STF रिपोर्ट के बाद इमरजेंसी बैठक, लिए जा सकते हैं बड़े फैसले
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थिति देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त जबरदस्त हड़कंप मच गया, जब राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अपनी एक बेहद गोपनीय और सनसनीखेज जांच रिपोर्ट शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी। इस रिपोर्ट के सामने आते ही केजीएमयू प्रबंधन में खलबली मच गई है और आनन-फानन में एक उच्चस्तरीय इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ की इस रिपोर्ट में संस्थान के कई वरिष्ठ डॉक्टरों, विभागाध्यक्षों और प्रोफेसरों पर गंभीर अनियमितताओं, प्रशासनिक गड़बड़ियों और वित्तीय हेरफेर के बेहद संगीन आरोप लगाए गए हैं। माना जा रहा है कि इस आपातकालीन बैठक के बाद आरोपी डॉक्टरों और प्रोफेसरों पर अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिससे पूरे प्रदेश के चिकित्सा जगत में हड़कंप का माहौल व्याप्त है।
जानिए क्या है एसटीएफ की गोपनीय रिपोर्ट में, जिससे बैकफुट पर आया केजीएमयू प्रशासन
एसटीएफ द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत रिपोर्ट में केजीएमयू के भीतर लंबे समय से चल रहे कई संदेहास्पद खेल और अनियमितताओं का कच्चा चिट्ठा उजागर किया गया है। जांच एजेंसियों को पिछले काफी समय से दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में वित्तीय हेरफेर, मरीजों को निजी पैथोलॉजी व मेडिकल स्टोर्स पर भेजने के कमीशन खेल और फर्जी शोध पत्रों व प्रमोशन में गड़बड़ी जैसी गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। इसके अलावा, सरकारी ड्यूटी के घंटों के दौरान निजी प्रैक्टिस (Private Practice) करने और अनाधिकृत रूप से गैर-मौजूद रहने के भी ठोस सबूत मिले हैं। एसटीएफ की सर्विलांस और जमीनी जांच में पाया गया कि कुछ प्रोफेसर और डॉक्टर अपने पद का दुरुपयोग करके संस्थान को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे थे और गरीब मरीजों के हक पर डाका डाल रहे थे। इन अकाट्य सबूतों के साथ जब रिपोर्ट शासन को सौंपी गई, तो केजीएमयू प्रशासन के पास आपातकालीन बैठक बुलाने और कठोर कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
कुलपति की अध्यक्षता में बुलाई गई आपातकालीन बैठक, सामूहिक कार्रवाई के संकेत
एसटीएफ की रिपोर्ट के मिलते ही केजीएमयू के कुलपति और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी विभागाध्यक्षों और कार्यकारी परिषद के सदस्यों के साथ एक बंद कमरे में इमरजेंसी मीटिंग की। इस महत्वपूर्ण बैठक में एसटीएफ द्वारा चिह्नित किए गए प्रत्येक डॉक्टर और प्रोफेसर के खिलाफ प्रस्तुत सबूतों पर बिंदुवार चर्चा की गई। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि प्रशासन अब किसी भी आरोपी को बख्शने के मूड में नहीं है और शासन के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए कई डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जा सकता है या उन्हें जांच पूरी होने तक प्रशासनिक पदों से हटाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में शामिल पाए जाने वाले प्रोफेसरों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी और एफआईआर (FIR) दर्ज कराने जैसी कठोर सिफारिशें भी इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश के चिकित्सा महकमे में मचा हड़कंप, मरीजों में जगी न्याय की उम्मीद
केजीएमयू जैसे विश्वस्तरीय संस्थान में डॉक्टरों और प्रोफेसरों के खिलाफ होने जा रही इस संभावित बड़ी कार्रवाई की खबर से लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश के चिकित्सा महकमे में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां अन्य मेडिकल कॉलेजों के फैकल्टी मेंबर्स में डर का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों से रोज हजारों की संख्या में आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजनों ने इस कदम का स्वागत किया है। आम जनता का कहना है कि केजीएमयू जैसे संस्थान में भ्रष्टाचार और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण गरीब मरीजों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता था। एसटीएफ की इस सख्त रिपोर्ट और प्रशासन के कड़े तेवरों से यह उम्मीद जगी है कि अब संस्थान में पारदर्शिता आएगी, दलालों व भ्रष्ट डॉक्टरों के सिंडिकेट का खात्मा होगा और सही मायने में जरूरतमंदों को बेहतर और निष्पक्ष इलाज मिल सकेगा।
निष्कर्ष: केजीएमयू की साख बचाने और पारदर्शिता के लिए प्रशासनिक चाबुक जरूरी
संक्षेप में कहें तो एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के बाद केजीएमयू में मची यह खलबली इस ऐतिहासिक संस्थान की साख को दोबारा स्थापित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम साबित हो सकती है। अगर इस इमरजेंसी बैठक के बाद दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों और प्रोफेसरों पर कड़ी गाज गिरती है, तो यह पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के लिए एक मजबूत और कड़ा संदेश होगा कि मरीजों की जिंदगी और सरकारी संपत्ति से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।