भागवत कथा से राम मंदिर की पिच तक, अखिलेश यादव का 'सॉफ्ट हिंदुत्व' दांव देख उड़े भाजपा के होश

भागवत कथा से राम मंदिर की पिच तक, अखिलेश यादव का 'सॉफ्ट हिंदुत्व' दांव देख उड़े भाजपा के होश

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा इलेक्शन की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अब सीधे भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत सियासी गढ़ अयोध्या में मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। पूर्व मंत्री और सपा नेता तेजनारायण उर्फ पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शिरकत करने के बाद से ही यह संकेत मिल रहे थे कि सपा अब भाजपा को उसी की पिच पर चुनौती देने जा रही है। पार्टी के भीतर इसे 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी अगली अहम कड़ी अखिलेश यादव का आगामी 12 दिसंबर को होने वाला सपरिवार अयोध्या दौरा है।

इस पूरी सियासी घेराबंदी का केंद्र अयोध्या विधानसभा सीट है, जहां भव्य राम मंदिर स्थित है। सपा ने वक्त से काफी पहले ही पवन पांडेय को इस सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। पार्टी ने लखनऊ में 5 अगस्त को आयोजित एक कार्यक्रम में उनके नाम पर मुहर लगाई थी। अयोध्या हमेशा से भाजपा के वैचारिक और चुनावी अभियान की धुरी रही है, मगर 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट से सपा सांसद अवधेश प्रसाद की जीत ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया था। दो बार के भाजपा सांसद लल्लू सिंह की उस अप्रत्याशित हार के झटके के बाद सपा अब इसी विधानसभा सीट पर कब्जा जमाकर भाजपा के कोर एजेंडे को स्थायी चुनौती देना चाहती है।

अयोध्या सीट का चुनावी इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है। पवन पांडेय ने 2012 के अपने पहले ही चुनाव में पांच बार के विधायक लल्लू सिंह को मात देकर सबको चौंका दिया था। हालांकि, 2017 और 2022 की मोदी-योगी लहर में भाजपा प्रत्याशी वेदप्रकाश गुप्त के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित अखिलेश यादव अयोध्या विधानसभा सीट जीतकर उस सियासी जीत की पुनरावृत्ति करना चाहते हैं। दीपोत्सव के बड़े आयोजन के दौरान ही अखिलेश के 12 दिसंबर के अयोध्या दौरे की जानकारी सार्वजनिक कर सपा ने हेडलाइन मैनेजमेंट में भी बढ़त हासिल कर ली है।

अखिलेश यादव के इस दौरे के पीछे गहरा भौगोलिक और क्षेत्रीय समीकरण भी छिपा है। सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्या की सीमाएं गोंडा और बस्ती जैसे अहम जिलों से सीधे जुड़ती हैं। ऐसे में 12 दिसंबर के कार्यक्रम में अयोध्या के अलावा आसपास के चार-पांच जिलों से बड़ी तादाद में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के जुटने की पूरी संभावना है। पड़ोसी जिलों के इस जमावड़े और संभावित भीड़ के जरिए समाजवादी पार्टी अवध क्षेत्र में अपनी सांगठनिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी में है।