मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की उडी धज्जियाँ, नई ई0आर0पी0 एवं सेंट्रल ए0सी0 के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट !
वन विभाग के मंत्री हैं डॉ अरुण कुमार सक्सेना जिनके पास वन निगम के अध्यक्ष का भी पद भार है। मामला चाहे वन विभाग का हो या फिर वन निगम का, भ्रष्टाचार के आरोप अक्सर लगते रहते हैं। विभाग में हो रहे या हुए भ्रष्टाचार को लेकर मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना से सवाल भी पूछे जाते रहे हैं जिनपर मंत्री जी का एक ही उत्तर अक्सर मिलता है कि मामले की जाँच की जाएगी और उसपर कार्रवाई की जाएगी। जाँच के आदेश भी दिए जाते हैं लेकिन जाँच या तो होती नहीं , अगर होती भी है तो कार्रवाई एक स्टेज पर आकर कहीं न कहीं फाइलों में दफ़न हो जाती है। वन निगम एक बड़ा स्कैम तब सबसे अधिक चर्चा में आया जब करोड़ों रुपए पी चुके सॉफ्टवेयर ने भ्रष्टतंत्र के आगे घुटने टेकते हुए काम करना बंद कर दिया जबकि बीते कुछ महीनों के अंदर चार करोड़ का अग्रिम भुगतान सॉफ्टवेयर (नई ई0आर0पी0) के नाम पर हुआ। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इन चार करोड़ रुपयों का बंदरबांट हो गया। सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात ये है कि इस बार सॉफ्टवेयर का काम वन निगम में कार्यरत उस आउट सोर्सिंग कम्पनी को दिया गया जिसका सॉफ्टवेयर से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं। सूत्र बताते हैं कि आउट सोर्सिंग कम्पनी मंत्री जी की चहेती और भरोसेमंद है इसलिए उसे सॉफ्टवेयर (नई ई0आर0पी0) का भी काम दे दिया गया साथ ही अग्रिम भुगतान के तौर पर चार करोड़ रूपये भी दे दिए गए जिनकी बंदरबांट की चर्चाये निगम में जोरों पर हैं।
माहौल तब गरमा गया जब बीते 30 सितम्बर से नई ई0आर0पी0 यानि सॉफ्टवेयर सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। आपको बता दें कि सॉफ्टवेयर बंद होने के कारन निगम का सारा कामकाज ठप हो गया। दो माह बीत गए सारा कारोबार ठप होने कारन निगम को करोड़ों की चपत लग चुकी है लेकिन जिम्मेदार इस मामले पर मौन हैं।
खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश वन निगम द्वारा पुरानी ई0आर0पी0 के सञ्चालन का अनुबंध एक वर्ष के लिए सितम्बर 2025 तक किया गया था जिसके लिए 2 करोड़ 50 लाख का भुगतान किया गया। फिर अनुबंध को पुनः मार्च 2026 तक बढ़ाया गया जिसके लिए लगभग 1 करोड़ 25 लाख का भुगतान किया गया।फिर अनुबंध को मार्च 2026 से बढ़ाकर सितम्बर 2026 तक किया गया जिसके लिए पुनः 1 करोड़ 25 लाख का भुगतान किया गया। इसमें चौंकाने वाली बात ये है कि माह मई - जून 2025 में नई ई0आर0पी0 (जिसमें पुरानी ई0आर0पी0 के सापेक्ष कोई बदलाव नहीं है) को बनाने के लिए लगभग 12 करोड़ रूपये की लगत से नया सॉफ्टवेयर बनाने हेतु जेम पोर्टल के माध्यम से टेंडर आमंत्रित किया गया और नई ई0आर0पी0 बनाने वाली कम्पनी को लगभग चार करोड़ रुपयों का भुगतान भी कर दिया गया जिसके बंदरबांट की खबर है।
पुरानी ई0आर0पी0 30/09/2026 की मध्य रात्रि से बंद कर दी गयी वहीँ नई ई0आर0पी0 बनाने वाली कम्पनी को करोड़ों के भुगतान के के बाद भी एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद अभी तक नई ई0आर0पी0 चालू नहीं हो पायी है।जिसकी वजह से निगम के समस्त काम जैसे उत्पादन, बिक्री ,लेखा, तेंदूपत्ता, वेतन, एवं राजस्व से संबंधित समस्त कामकाज पूरी तरह से ठप है। चूँकि वन निगम एक वाणिज्यिक संसथान है जिसकी आय का एकमात्र स्रोत नीलाम से बिक्री की गयी लकड़ी से प्राप्त आय और तेंदूपत्ता की बिक्री से प्राप्त आय है जिससे राज्य सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति होती है कि भारी भरकम क्षति हो रही है बावजूद इसके महकमे के हुक्मरान कानों में तेल डाले गहरी निद्रा में हैं।
इस मामले में जब निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार सिंह से बात करनी चाही तो उनकी बातें सुनकर ऐसा लगा मानों नशें में हों लेकिन इस हालत में एमडी अरविंद कुमार सिंह ने जो कहा वो हैरान करने वाला था...जारी
क्रमशः