राहुल गांधी को सुल्तानपुर कोर्ट से सबसे बड़ी राहत! 8 साल पुराना मानहानि केस खत्म, पूरी तरह बरी
यूपी के सुल्तानपुर स्थित स्पेशल एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने सोमवार को लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत देते हुए मानहानि के एक पुराने मामले में दोषमुक्त करार दिया है। 8 साल पुराने इस केस की सुनवाई के दौरान जज शुभम वर्मा की अदालत में राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। उनके सुल्तानपुर पहुंचने को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर था और कोर्ट परिसर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
राहुल गांधी के बरी होने की खबर जैसे ही कोर्ट रूम से बाहर आई, वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे और नाच-गाकर जश्न मनाने लगे। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर इस फैसले का स्वागत करते हुए 'सत्यमेव जयते' लिखा। यह पूरा विवाद साल 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार से जुड़ा है, जब राहुल गांधी ने बेंगलुरु की एक चुनावी सभा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। 8 मई 2018 को राहुल ने 2005 के सोहराबुद्दीन शेख मामले का जिक्र करते हुए कहा था कि बीजेपी ईमानदारी की बात करती है, जबकि उनके अध्यक्ष हत्या के आरोपी रहे हैं।
हालांकि, शाह को 2014 में ही इस मामले में बरी कर दिया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी दोबारा जांच की मांग खारिज कर दी थी। राहुल के इसी बयान से आहत होकर सुल्तानपुर के स्थानीय बीजेपी नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में कोर्ट ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को तलब किया था, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।
शिकायतकर्ता ने राहुल की आवाज के सैंपल का मिलान कराने की अर्जी भी दी थी, जिसे निचली अदालत, सेशन कोर्ट और अंततः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। सोमवार को राहुल गांधी चौथी बार सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए और आखिरकार उन्हें इस लंबे कानूनी विवाद से मुक्ति मिल गई। इसी सियासी गहमागहमी के बीच, बयानबाजी का एक नया विवाद भी जन्म ले चुका है; रविवार को पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पीएम मोदी के पिता पर की गई विवादित टिप्पणी पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'गुंडों वाली भाषा' करार दिया है।