राहुल गांधी के 'शिव की बारात' वाले बयान पर गरमाई राष्ट्रीय राजनीति
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक इस वक्त एक बहुत बड़ा वैचारिक और सियासी भूचाल आया हुआ है। हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा अपने राजनीतिक प्रदर्शन और मार्च की तुलना भगवान शिव की बारात और शिव तांडव से किए जाने पर चारों तरफ तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। राहुल गांधी के इस बयान को लेकर देश भर के हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों में रोष व्याप्त है, वहीं अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने इस पर बेहद कड़ा और दो टूक बयान दिया है। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आस्था, अध्यात्म और भगवान शिव जैसी महान शक्तियों की पूजा कभी भी राजनीतिक प्रदर्शन या ढिंढोरा पीटने की वस्तु नहीं हो सकती। धार्मिक प्रतीकों को अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार करते हुए सीएम योगी की इस टिप्पणी ने राष्ट्रीय राजनीति के तापमान को और अधिक बढ़ा दिया है।
क्या था राहुल गांधी का वह विवादित बयान जिस पर छिड़ी है देशव्यापी बहस और क्यों हो रही है आलोचना?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब दिल्ली में विपक्ष के एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन और मार्च के दौरान मीडिया द्वारा यह पूछा गया कि इस आंदोलन की क्या कोई पूर्व नियोजित रणनीति या स्क्रिप्ट है या नहीं। इसके जवाब में राहुल गांधी ने बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि इस आंदोलन की कोई योजना नहीं है, यह तो "शिव की बारात" चल रही है, जिसमें कोई भी आ सकता है, कोई भी नृत्य कर सकता है, और यह भगवान शिव का तांडव है। उनके इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी और देश के अन्य हिस्सों में तीखा विरोध शुरू हो गया। आलोचकों और बीजेपी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए देवों के देव महादेव और उनकी पावन बारात जैसी पवित्र धार्मिक अवधारणाओं का इस तरह से राजनीतिक संदर्भों में इस्तेमाल करना सनातन संस्कृति और हिंदू आस्था का सीधा अपमान है।
"शिव की पूजा करनी है तो आचरण और कर्म भी उसी अनुरूप होने चाहिए": सीएम योगी आदित्यनाथ का कड़ा प्रहार
लखनऊ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के इस बयान पर निशाना साधते हुए आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से गहरी बात कही। सीएम योगी ने कहा, "शिवो भूत्वा शिवं यजेत यानी जब हम भगवान शिव या किसी भी इष्ट की सच्चे मन से पूजा करते हैं, तो हमारी कार्यशैली और आचरण भी उसी के अनुरूप होने चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि पूजा और साधना कभी भी प्रदर्शन (Show-off) की वस्तु नहीं होती, बल्कि यह अंतःकरण की एक पवित्र आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग अपनी राजनीतिक विफलताओं और सड़क पर किए जाने वाले हुड़दंग को छिपाने के लिए धार्मिक प्रतीकों का आवरण ओढ़ने का प्रयास करते हैं, वे न तो सनातन परंपरा की गहराई को समझ सकते हैं और न ही देवत्व का सम्मान कर सकते हैं।
सनातन संस्कृति और राजनीतिक प्रतीकों की जंग: आगामी चुनावों से पहले गरमाता जा रहा है सियासत का माहौल
उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक प्रतीकों, कथाओं और देवी-देवताओं के संदर्भों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक अघोषित वैचारिक युद्ध छिड़ा हुआ है। एक तरफ जहां कांग्रेस और विपक्षी दल खुद को सॉफ्ट हिंदुत्व या सर्वधर्म समभाव के दायरे में साबित करने की कोशिश करते हैं, वहीं बीजेपी उन पर 'चुनावी हिंदू' होने और राजनीतिक स्वार्थ के लिए धार्मिक मान्यताओं का उपहास उड़ाने का आरोप लगाती है। राहुल गांधी के इस तांडव और शिव बारात वाले बयान को बीजेपी ने पूरी तरह से सनातन संस्कृति के खिलाफ एक बचकाना और गैर-जिम्मेदाराना बयान करार दिया है। बहरहाल, सीएम योगी आदित्यनाथ की इस दो टूक नसीहत के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ेगा तथा राजनीतिक मंचों पर इस पर लंबी बहस देखने को मिलेगी।