प्रेमी गया जेल तो प्रेमिका बन गई ड्रग्स क्वीन, चाय की दुकान से काला कारोबार, नेपाल से तस्करी
अपराध और प्यार की दुनिया के कई अजीबोगरीब किस्से सामने आते रहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाके से सामने आई यह सनसनीखेज वारदात किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट से भी ज्यादा चौंकाने वाली है। जिस महिला को आसपास के लोग एक साधारण चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीधी-साधी दुकानदार समझते थे, वह असल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के नशीले पदार्थों के नेटवर्क को संचालित करने वाली एक शातिर 'ड्रग्स क्वीन' निकली। स्थानीय पुलिस और नारकोटिक्स इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने जब एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की, तो इस चाय की दुकान के पीछे छिपा काला सच देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। जांच में खुलासा हुआ कि जब इस महिला का प्रेमी नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में पकड़ा गया और जेल की सलाखों के पीछे चला गया, तो उसने हताश होने के बजाय खुद पूरे नेटवर्क की कमान संभाल ली। देखते ही देखते उसने नेपाल से होने वाली नशे की सप्लाई चेन पर अपना पूर्ण नियंत्रण जमा लिया और चाय की आड़ में युवाओं की जिंदगी में जहर घोलने का काम करने लगी।
साधारण चाय-नाश्ते की दुकान बनी अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों का गुप्त सेफ हाउस
स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आरोपी महिला ने मुख्य बाजार और हाइवे को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर चाय की एक छोटी सी गुमटी खोल रखी थी। इस दुकान पर दिन भर आम ग्राहकों और राहगीरों की आवाजाही लगी रहती थी, जिससे किसी को भी उस पर रत्ती भर भी शक नहीं होता था। हालांकि, चाय की केतली और बिस्कुट के डिब्बों के पीछे बेहद शातिराना तरीके से अफीम, स्मैक, हेरोइन और नशीली गोलियों के छोटे-छोटे पैकेट्स छिपाकर रखे जाते थे। जो ग्राहक कोड वर्ड (Code Words) में बात करते थे, उन्हें चाय के साथ स्पेशल पुड़िया थमा दी जाती थी। महिला इतनी चालाक थी कि उसने स्थानीय पुलिस की नजरों से बचने के लिए कभी भी अपनी दुकान पर बड़ा स्टॉक नहीं रखा, बल्कि नेपाल सीमा से सटे तस्करों के जरिए रोज छोटी-छोटी खेप मंगवाकर तुरंत ठिकाने लगा देती थी। इस गुप्त सेफ हाउस से हर दिन लाखों रुपये का नशीला कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा था।
नेपाल से सीमा पार तस्करी और भारत के युवाओं को गर्त में धकेलने वाला खौफनाक सिंडिकेट
इस पूरे मामले के तार भारत-नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा (Indo-Nepal Border) से सीधे जुड़े हुए पाए गए हैं। प्रेमी के जेल जाने के बाद महिला ने नेपाल के उन बड़े ड्रग सप्लायरों से सीधा संपर्क साधा, जो सीमा पार से अवैध खेप भारत भेजने का काम करते थे। नेपाल के पहाड़ी इलाकों से चरस, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स को पगडंडियों और महिला तस्करों के जरिए भारतीय सीमा में दाखिल कराया जाता था। इसके बाद इन नशीले पदार्थों को आसपास के जिलों के कॉलेज छात्रों, ई-रिक्शा चालकों और भटके हुए युवाओं तक पहुंचाया जाता था। पुलिस पूछताछ में आरोपी महिला ने कबूल किया कि प्रेमी के जेल जाने के बाद उसे पैसों की सख्त जरूरत थी और ड्रग्स के इस कारोबार में मिलने वाले मोटे मुनाफे ने उसे रातों-रात 'ड्रग्स क्वीन' बना दिया। उसने बहुत ही कम समय में अपना एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया था जो पूर्वांचल के कई जिलों में स्मैक की होम डिलीवरी तक करने लगा था।
स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस की संयुक्त छापेमारी में भंडाफोड़, भारी मात्रा में चरस बरामद
लंबे समय से मिल रही गोपनीय शिकायतों के बाद स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस की टीम ने जाल बिछाया। पुलिस ने एक फर्जी ग्राहक को बोगस बायर बनाकर उस चाय की दुकान पर भेजा। जैसे ही महिला ने कोड वर्ड सुनते ही स्मैक की पुड़िया निकाली, पहले से घात लगाकर बैठी पुलिस टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। दुकान और उसके घर की गहन तलाशी लेने पर भारी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय मानक की फाइन क्वालिटी स्मैक, अफीम, इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीन (वजन मापने वाला कांटा), कई फर्जी सिम कार्ड और लाखों रुपये की नगदी बरामद की गई। जब्त किए गए नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कई लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है और अब उसके मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू कर दी है।
निष्कर्ष: कानून के शिकंजे में आई 'ड्रग्स क्वीन', नेपाल बॉर्डर पर बढ़ाई गई चौकसी
संक्षेप में कहें तो चाय की दुकान की आड़ में नेपाल से नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी करने वाली इस 'ड्रग्स क्वीन' की गिरफ्तारी पुलिस की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मानी जा रही है। इस घटना के सामने आने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों और एसएसबी (SSB) को अलर्ट मोड पर रख दिया गया है ताकि सीमा पार से होने वाले इस काले कारोबार की रीढ़ को पूरी तरह से तोड़ा जा सके।