पहाड़ में नौकरी से किया इनकार तो जिंदगी भर का बैन, उत्तराखंड में डॉक्टरों के लिए सरकार का सबसे खौफनाक फैसला
उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में चयन के बावजूद कार्यभार ग्रहण न करने वाले एमबीबीएस डॉक्टरों के खिलाफ प्रदेश सरकार ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। राज्य सरकार डॉक्टरों की भर्ती नियमावली में बड़ा संशोधन करने जा रही है, जिसके लागू होते ही एक बार नौकरी ठुकराने या बीच में छोड़ने वाले चिकित्सकों को दोबारा भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर नहीं मिलेगा। इसके साथ ही नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के कड़े निर्देशों के तहत सरकारी और निजी डॉक्टरों द्वारा अपने निजी या व्यावसायिक प्रचार-प्रसार में मरीजों के चेहरे, आवाज या पहचान का इस्तेमाल करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों का मेडिकल प्रैक्टिस लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाएगा।
स्वास्थ्य महकमे में यह कठोर फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि मेडिकल ऑफिसर पद पर चयनित होने के बाद भारी तादाद में डॉक्टर अपनी सेवाएं देने नहीं पहुंचते। अधिकांश मामलों में पहाड़ के दुर्गम और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती मिलना इसकी मुख्य वजह बनता है। चयनित डॉक्टर या तो पहाड़ी इलाकों में पदभार संभालते ही नहीं या फिर कुछ ही महीनों में नौकरी छोड़कर चले जाते हैं। बाद में जब सुगम यानी मैदानी इलाकों के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है, तो वे दोबारा आवेदन कर देते हैं। इस मनमानी के चलते पहाड़ी क्षेत्रों के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों के पद लगातार खाली रहते हैं और विभाग को बार-बार भर्ती प्रक्रिया का झंझट उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने दो टूक स्पष्ट किया है कि चयनित होकर ज्वाइन न करने वाले डॉक्टरों के लिए दरवाजे हमेशा के लिए बंद किए जाएंगे और इसके लिए अधिकारियों को नियमावली में तुरंत संशोधन के निर्देश दे दिए गए हैं।
डॉक्टरों पर कसी नकेल
दूसरी तरफ, नेशनल मेडिकल कमीशन ने डॉक्टरों के सेल्फ प्रमोशन के तौर-तरीकों पर भी नकेल कस दी है। अब कोई भी सरकारी या निजी डॉक्टर अपने प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर मरीजों के फोटो, वीडियो, आवाज या पेड रिव्यू का उपयोग नहीं कर सकेगा। डॉक्टरों द्वारा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के जरिए फॉलोअर्स बढ़ाने और पेड पब्लिसिटी कराने पर भी रोक लगा दी गई है।
एनएमसी के इस आदेश के बाद उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सुधीर पांडेय ने प्रदेश में पंजीकृत 15 हजार से अधिक डॉक्टरों को आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। डॉ. पांडेय ने साफ चेतावनी दी है कि पहली बार नियम तोड़ने पर डॉक्टर को नोटिस जारी होगा, दूसरी बार उल्लंघन पर तीन माह के लिए लाइसेंस निलंबित किया जाएगा और इसके बाद भी मनमानी जारी रहने पर डॉक्टर का स्थायी मेडिकल पंजीकरण हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाएगा।