2027 के महासमर से पहले उत्तराखंड की राजनीति में आया बड़ा भूचाल
उत्तराखंड की प्रादेशिक राजनीति और आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के दृष्टिकोण से इस वक्त एक बहुत बड़ी, चौकाने वाली और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा देने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उधम सिंह नगर जिले का सिरोली कलां (Sirauli Kalan) इलाका सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर उभरा है। हाल ही में हुए निकाय चुनावों की अटकाव-भटकी प्रक्रिया के बीच देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक कड़े फैसले ने पूरा राजनीतिक पासा ही पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद तुरंत हुई मतगणना में किच्छा और सिरोली कलां दोनों ही नगर पालिका सीटों पर विपक्षी दल कांग्रेस ने धमाकेदार जीत दर्ज करते हुए अपना परचम लहरा दिया है। इस करारी हार और कानूनी मोर्चे पर लगे झटके ने 2027 के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है।
क्या है सिरोली कलां का पूरा कानूनी विवाद और कैसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से थमी राज्य सरकार की रणनीति?
सिरोली कलां को लेकर विवाद काफी समय से गहराता चला आ रहा था। किच्छा नगर पालिका का हिस्सा रहे इस मुस्लिम बहुल इलाके को राज्य सरकार ने साल 2021 में परिसीमन के तहत एक अलग 'नगर पंचायत' बनाने की अधिसूचना जारी की थी, जिससे स्थानीय ग्रामीण काफी हैरान और नाराज थे। ग्रामीणों का कहना था कि यह उनके क्षेत्र का डिमोशन था। इसके बाद मामला कोर्ट में गया और लंबे कानूनी दांव-पेचों के बाद जब सितंबर 2026 में मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई, तो राज्य निर्वाचन आयोग और प्रशासन ने मतगणना को टालने का प्रयास किया। नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से तीन सप्ताह का समय दिए जाने के फैसले के खिलाफ किच्छा के कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ और स्थानीय याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग की दलीलों को खारिज करते हुए तुरंत मतगणना कराने का कड़ा आदेश दे दिया, जिसके बाद परिणाम सार्वजनिक हुए।
नतीजों ने उड़ाए सत्ता के होश: किच्छा और सिरोली कलां दोनों ही सीटों पर कांग्रेस ने दर्ज की एकतरफा जीत
सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत के बाद जब मतपेटियां खोली गईं तो मतगणना के आंकड़े भाजपा के लिए बेहद निराशाजनक और झटकेदार रहे। किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी राजेश प्रताप ने भाजपा के संदीप अरोड़ा को 6,200 वोटों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी। वहीं पहली बार अस्तित्व में आई सिरोली कलां नगर पालिका परिषद की सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी राशिदा बेगम ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार फरहीन जहां को 1,773 मतों से हरा दिया। सिरोली कलां और किच्छा में कांग्रेस की इस दोहरी सफलता ने तराई क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा भर दी है, जबकि निकाय चुनावों में मिली इस अप्रत्याशित हार ने सत्ताधारी खेमे के रणनीतिकारों को अपनी जमीनी रणनीति पर दोबारा सोचने को मजबूर कर दिया है।
2027 के विधानसभा चुनावों पर क्या पड़ेगा इसका असर? तराई की राजनीति में नए सियासी समीकरणों का उदय
तराई का उधम सिंह नगर जिला उत्तराखंड की राज्य सत्ता की कुंजी माना जाता है। सिरोली कलां जैसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र और उससे सटे किच्छा के यह चुनावी नतीजे साफ संकेत दे रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय जनता में प्रशासनिक फैसलों और परिसीमन के बदलावों को लेकर नाराजगी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर परिसीमन और नगर निकायों के पुनर्गठन की कोशिशें भाजपा के लिए उल्टी साबित हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जहां एक तरफ प्रशासनिक देरी को खारिज कर निष्पक्ष जनादेश का रास्ता साफ किया, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस को 2027 के बड़े चुनाव से पहले एक मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त दे दी है। अब देखना यह होगा कि भाजपा 2027 के महासमर से पहले तराई के इस असंतोष को पाटने के लिए क्या नई रणनीति अपनाती है।