ट्रैकिंग के रोमांच पर टूटा कुदरत का कहर, केदारताल ट्रैक पर 8 जिंदगियां बर्फीले बवंडर में गुम

ट्रैकिंग के रोमांच पर टूटा कुदरत का कहर, केदारताल ट्रैक पर 8 जिंदगियां बर्फीले बवंडर में गुम

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के रोमांच का शौक रखने वाले सैलानियों के लिए एक बेहद दर्दनाक और डराने वाली खबर सामने आ रही है। देवभूमि के प्रसिद्ध और बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले केदारताल ट्रैक (Kedartal Trek) पर प्रकृति ने अपना ऐसा भयंकर कहर बरपाया है कि हर किसी का दिल दहल उठा है। अचानक आए एक भीषण और शक्तिशाली बर्फीले बवंडर (Blizzard) की चपेट में आकर ट्रेकर्स का एक पूरा दल पर्वतों की सफेद चादर के बीच कहीं गुम हो गया है। इस खतरनाक हिमस्खलन और बर्फीले तूफान में 8 जिंदगियों के लापता होने की खबर से देश भर में हड़कंप मच गया है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर माइनस तापमान और बर्फीली हवाओं के बीच फंसे इन ट्रेकर्स को बचाने के लिए राज्य प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन और एसएंडआर (SDRF) की टीमों ने युद्धस्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है, लेकिन मौसम की बेरुखी राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

केदारताल ट्रैक का रोमांच और अचानक मौसम का खतरनाक यू-टर्न

गंगोत्री से करीब 17 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारताल अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, नीले पानी की झील और ऊंचे बर्फीले पहाड़ों के लिए दुनिया भर के ट्रेकर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है। हर साल हजारों की संख्या में साहसिक सैलानी इस कठिन ट्रैक को पार करने के लिए उत्तराखंड आते हैं। लेकिन अक्टूबर-नवंबर के इस महीने में पहाड़ों का मिजाज पल-पल में बदल जाता है। लापता हुआ यह ट्रेकर्स का दल सभी जरूरी परमिशन और गाइड के साथ केदारताल की ओर आगे बढ़ रहा था। सब कुछ सामान्य चल रहा था कि तभी दोपहर के वक्त आसमान में अचानक काले बादल छा गए और मौसम ने ऐसा खतरनाक यू-टर्न लिया कि कुछ ही मिनटों में तेज बर्फबारी के साथ एक भयानक बर्फीला बवंडर पूरे इलाके में फैल गया। दृश्यता (Visibility) शून्य पर पहुंच गई और ट्रेकर्स को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

बर्फीले बवंडर की चपेट में आया दल, 8 ट्रेकर्स का संपर्क टूटा

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, जब यह बर्फीला तूफान आया, तो ट्रेकर्स का यह दल केदारताल के सबसे संकरे और दुर्गम हिस्से को पार कर रहा था। अचानक आए इस नेचुरल डिजास्टर की वजह से दल के सदस्य एक-दूसरे से बिछड़ गए। उनके साथ मौजूद स्थानीय पोर्ट्स और गाइडों ने जब सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर बेस कैंप को घटना की सूचना दी, तो पता चला कि कुल 8 ट्रेकर्स इस बर्फीले बवंडर के बीच लापता हो चुके हैं। उनका संपर्क बेस कैंप से पूरी तरह से टूट चुका है। बर्फीले तूफान के बाद पहाड़ों पर जमी बर्फ की मोटी परतों और लगातार हो रही बर्फबारी के कारण यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है कि वे सभी सुरक्षित स्थान पर शरण लिए हुए हैं या फिर हिमस्खलन (Avalanche) की भारी चपेट में आ गए हैं।

युद्धस्तर पर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन: एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें मैदान में

केदारताल ट्रैक पर 8 जिंदगियों के गुम होने की सूचना मिलते ही उत्तरकाशी जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की संयुक्त टीमों को तुरंत अलर्ट कर दिया गया है। खराब मौसम और भारी बर्फबारी के बावजूद बचाव दलों ने गंगोत्री बेस कैंप से ट्रैक की तरफ पैदल ही कूच कर दिया है। चूंकि अत्यधिक ऊंचाई और खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर या ड्रोन का इस्तेमाल करना फिलहाल असंभव साबित हो रहा है, इसलिए अनुभवी पर्वतारोहियों और स्थानीय गाइडों की मदद से रेस्क्यू टीमों को मैदान में उतारा गया है। बचाव दल अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर, मेडिकल किट और आधुनिक स्नो-कटर उपकरणों के साथ आगे बढ़ रहे हैं ताकि जल्द से जल्द उस स्थान तक पहुंचा जा सके जहां ट्रेकर्स के फंसे होने की आशंका है।

पहाड़ों की चढ़ाई और सर्दियों के मौसम में सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

हर साल हिमालयी ट्रैकिंग के दौरान इस तरह की त्रासदियां प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रेकर्स की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों की शुरुआत में जब मौसम तेजी से बदलता है, तो उच्च हिमालयी ट्रेक पर जाने से पहले मौसम के मिजाज का सटीक आकलन होना बेहद जरूरी है। कई बार रोमांच के चक्कर में सैलानी चेतावनी को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा अपनी जान जोखिम में डालकर चुकाना पड़ता है। उत्तराखंड सरकार और वन विभाग लगातार यह निर्देश जारी करते रहते हैं कि बिना स्थानीय प्रशासन की अनुमति और मौसम की पूरी जानकारी के किसी भी ट्रैक पर आगे न बढ़ें, इसके बावजूद इस तरह के हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।

चमत्कार की उम्मीद में पूरा देश, परिवारों की सांसें अटकीं

केदारताल के बर्फीले बवंडर में लापता हुए 8 ट्रेकर्स के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे अपने परिजनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं। बचाव दलों के आगे सबसे बड़ी चुनौती समय की है, क्योंकि माइनस डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे बर्फ के बीच ज्यादा समय तक जीवित रहना किसी भी इंसान के लिए बेहद कठिन होता है। उत्तरकाशी के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक खुद इस पूरे राहत अभियान की निगरानी कर रहे हैं। पूरा देश और उत्तराखंड प्रशासन यही प्रार्थना कर रहा है कि रेस्क्यू टीमें जल्द से जल्द उन 8 जिंदगियों तक सुरक्षित पहुंच जाएं और कुदरत के इस कहर से बचाकर उन्हें सकुशल नीचे ले आएं। आने वाले कुछ घंटे इन लापता ट्रेकर्स की जिंदगी के लिए सबसे ज्यादा निर्णायक होने वाले हैं।