बाकी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी ठाठ, मेरे पीछे CBI और ED, हरीश रावत ने भाजपा पर क्यों दागा यह बड़ा सवाल
उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में चल रही खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का बेहद भावुक और कड़ा बयान सामने आया है। कुमाऊं परिक्षेत्र में निकाली गई अपनी 'धन्यवाद यात्रा' को लेकर पार्टी हाईकमान द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के सिलसिले में रावत ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात की। इस अहम बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने साफ लफ्जों में कहा कि संगठन से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं होता; जिस दिन भी पार्टी नेतृत्व को यह महसूस होगा कि वे संगठन पर बोझ बन रहे हैं, वे बिना किसी हिचकिचाहट के घर बैठने का आदेश स्वीकार कर लेंगे।
सरकार पर लगाया ये बड़ा आरोप
प्रदेश प्रभारी से बातचीत के दौरान हरीश रावत ने कांग्रेस के साथ अपने दशकों पुराने निष्ठावान सफर का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2002 और 2012 के बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में भी वे पूरी मजबूती से पार्टी के साथ खड़े रहे, जिसके सम्मान में शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें केंद्रीय मंत्री और राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। लालकुआं और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों के अपने हालिया दौरों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता और जमीनी कार्यकर्ता आज भी उनकी पिछली चुनावी हार पर हैरान होते हैं। रावत ने सत्तारूढ़ दल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उम्र के इस पड़ाव में भी भारतीय जनता पार्टी उन्हें अपना सबसे बड़ा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानती है। यही वजह है कि राज्य के अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों को तमाम सरकारी सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि उनके पीछे जानबूझकर सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों को लगाया गया है।
अपनी वर्तमान राजनीतिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी आलाकमान को भी अहम सलाह दी। उन्होंने दो टूक कहा कि वे अब उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां किसी पद या नेता से प्रतिस्पर्धा की कोई गुंजाइश नहीं बचती। वे राजनीति में किसी के विरोधी नहीं बल्कि सभी के पूरक हैं और संगठन के हित में हर जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। रावत ने जोर देकर कहा कि अब यह पूरी तरह पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करता है कि वह उनके लंबे राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल किस रूप में और किस तरह से करना चाहता है।