हरिद्वार में प्रशासन का कड़ा एक्शन: जबरन भीख मंगवाने वाले गिरोहों पर शिकंजा
देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र और विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हरिद्वार में धर्मनगरी की मर्यादा को बनाए रखने और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने एक बहुत ही बड़ा और सख्त कदम उठाया है। हरिद्वार पुलिस ने शहर के विभिन्न चौराहों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और प्रमुख गंगा घाटों पर सक्रिय रहने वाले उन असामाजिक तत्वों और गिरोहों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया है जो मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों से जबरन भीख मंगवाने का अवैध धंधा चलाते हैं। इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने कई जगहों पर औचक छापेमारी करते हुए जबरन भीख मंगाने वाले और संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त लोगों को हिरासत में लिया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शहर के आपराधिक तत्वों और बाल श्रम कराने वाले माफियाओं में हड़कंप मच गया है। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि धार्मिक नगरी की आड़ में इस तरह के अमानवीय और गैरकानूनी कृत्यों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और संलिप्त पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हरिद्वार जिला प्रशासन और पुलिस का संयुक्त अभियान और पकड़े गए आरोपियों पर एफआईआर
हरिद्वार में लगातार मिल रही शिकायतों और तीर्थयात्रियों की बढ़ती परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देशन में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इसी टीम ने गुप्त सूचनाओं और खुफिया इनपुट के आधार पर हर की पौड़ी, पंतद्वीप पार्किंग, रेलवे स्टेशन और चंडी देवी मार्ग जैसे अति संवेदनशील इलाकों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने पाया कि कई संगठित गिरोह बाहर से आए मासूम बच्चों और असहाय लोगों को डरा-धमकाकर या उन्हें किराए पर लाकर जबरन भीख मांगने के काम में झोंक रहे थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में गंभीर मुकदमे दर्ज किए। इन आरोपियों पर बाल श्रम निषेध अधिनियम, मानव तस्करी से जुड़े पहलुओं और आईपीसी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब यह भी खंगालने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध नेटवर्क के तार राज्य के बाहर किन-किन अन्य शहरों या राज्यों से जुड़े हुए हैं ताकि मुख्य सरगनाओं को भी सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) से कराई गई आरोपियों की शिनाख्त
इस पूरी कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी पहलू यह रहा कि पुलिस ने पकड़े गए सभी संदिग्धों और भिक्षुओं की पहचान को पुख्ता करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। हरिद्वार पुलिस ने सभी आरोपियों के फिंगरप्रिंट्स यानी उंगलियों के निशानों को एनएफआईएस (National Automated Fingerprint Identification System - NAFIS) पोर्टल पर अपलोड किया और उनका मिलान देश भर के आपराधिक डेटाबेस से कराया। इस हाई-टेक स्कैनिंग के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इनमें से कोई आरोपी किसी अन्य राज्य में गंभीर आपराधिक मामलों, जैसे कि बच्चों के अपहरण, चोरी, लूटपाट या संगठित अपराधों में वांछित तो नहीं है। कई बार देश के विभिन्न राज्यों से बाल तस्कर और अपराधी पहचान बदलकर तीर्थ स्थलों पर शरण ले लेते हैं और भीख मांगने की आड़ में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। एनएफआईएस डेटाबेस के इस्तेमाल से पुलिस को यह जानने में बड़ी मदद मिली है कि पकड़े गए लोगों का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड कैसा रहा है, जिससे इस गिरोह के गहरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में कानूनी रूप से बहुत मजबूती मिली है।
तीर्थनगरी की गरिमा और सुरक्षा के लिए प्रशासन की आगे की रणनीति
हरिद्वार में आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा हमेशा से प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के कारण न केवल तीर्थनगरी की छवि धूमिल होती है, बल्कि पर्यटकों के मन में असुरक्षा की भावना भी पैदा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने अब शहरभर में एंटी-बगिंग स्क्वॉड (Anti-Begging Squad) को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है जो लगातार गश्त कर रही है। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे या बुजुर्ग को भीख मांगने के लिए मजबूर करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी नरमी के सीधी जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, सामाजिक कल्याण विभाग के सहयोग से रेस्क्यू किए गए बच्चों और जरूरतमंदों को उचित पुनर्वास केंद्रों, शेल्टर होम और बाल सुधार गृहों में भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और उन्हें बेहतर शिक्षा व जीवनयापन के अवसर मिल सकें।
आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से प्रशासन की खास अपील
इस पूरे अभियान के सफल संचालन के लिए हरिद्वार प्रशासन और पुलिस ने आम जनता, स्थानीय नागरिकों और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं से भी एक बड़ी अपील की है। प्रशासन का कहना है कि लोग धार्मिक भावनाओं में बहकर सड़क पर भीख मांगने वाले बच्चों या संदिग्ध लोगों को खुलेआम पैसे या सामान न दें, क्योंकि उनका यह दान अनजाने में बाल श्रम और भीख मांगने वाले संगठित माफियाओं को बढ़ावा देता है। यदि कोई जरूरतमंद या असहाय व्यक्ति वास्तव में मदद के हकदार नजर आता है, तो नागरिक सीधे तौर पर प्रशासन द्वारा संचालित रैन बसेरों, वृद्धाश्रमों या अधिकृत सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से उनकी मदद करें। पुलिस ने जनता से यह भी आग्रह किया है कि यदि उनके आसपास कहीं भी कोई व्यक्ति बच्चों से जबरन भीख मंगवाता हुआ या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो वे तुरंत पुलिस के हेल्पलाइन नंबर पर इसकी सूचना दें ताकि समय रहते ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके और देवभूमि की पवित्रता को सुरक्षित रखा जा सके।