300 से ज्यादा चीनी नागरिक गिरफ्तार, बचाने के लिए दूतावास को लगानी पड़ी गुहार

300 से ज्यादा चीनी नागरिक गिरफ्तार, बचाने के लिए दूतावास को लगानी पड़ी गुहार

अफ्रीकी महाद्वीप के खनिज संपन्न देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) से एक बेहद सनसनीखेज और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया भर में अपनी अकूत खनिज संपदा, विशेष रूप से तांबा (Copper) और कोबाल्ट के भंडारों के लिए मशहूर इस देश में सरकार ने अवैध खनन करने वाली विदेशी ताकतों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। कांगो की स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों और सेना ने देश के विभिन्न खनन क्षेत्रों में ताबड़तोड़ औचक छापेमारी करते हुए तीन सौ से अधिक चीनी नागरिकों को अवैध खनन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से अफ्रीकी देशों में धड़ल्ले से मिनरल्स का दोहन कर रहे विदेशी माफियाओं और कंपनियों के बीच हड़कंप मच गया है। कांगो सरकार पिछले काफी समय से इस बात से परेशान थी कि बिना वैध लाइसेंस और सरकारी अनुमति के कई बाहरी कंपनियां स्थानीय संसाधनों की बेरोकटोक लूट कर रही हैं, जिससे देश के राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा था और स्थानीय लोगों के रोजगार व अधिकारों पर भी संकट पैदा हो रहा था। इसी सुलगते मुद्दे पर आखिरकार प्रशासनिक मशीनरी का चाबुक चल ही गया और दर्जनों अवैध खनन अडレイs को सीज कर दिया गया।

चीनी नागरिकों की धड़पकड़ के बाद बीजिंग में मचा हड़कंप, ड्रैगन के दूतावास को लगानी पड़ी गुहार

कांगो की सुरक्षा बलों द्वारा एक साथ 300 से अधिक चीनी नागरिकों की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही ड्रैगन की राजधानी बीजिंग तक पहुंची, वहां कूटनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया। चीन की वैश्विक विस्तारवादी नीतियों और 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के तहत अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में चीनी कंपनियां और श्रमिक खनिज उत्खनन के कार्यों में लंबे समय से सक्रिय हैं। हालांकि, इनमें से कई छोटे और असंगठित समूह अवैध रूप से स्थानीय नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में तांबे की चोरी और अवैध निकासी का काम कर रहे थे। अपने नागरिकों की भारी संख्या में हुई इस गिरफ्तारी के बाद कांगो स्थित चीनी दूतावास (Chinese Embassy) तुरंत हरकत में आया और कांगो सरकार के समक्ष अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए राजनयिक स्तर पर तत्काल रिहाई की गुहार लगानी पड़ी। चीनी दूतावास के अधिकारियों ने पकड़े गए नागरिकों से मिलने की अनुमति मांगी है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि उनके साथ अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत व्यवहार किया जाए। लेकिन कांगो के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों की अवैध लूट को अब और अधिक सहन नहीं किया जाएगा और कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उनका संबंध किसी भी शक्तिशाली देश से क्यों न हो।

कांगो की अर्थव्यवस्था और स्थानीय समुदायों पर अवैध खनन का पड़ रहा था गंभीर असर

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक तकनीक में इस्तेमाल होने वाले तांबे और कोबाल्ट के सबसे बड़े भंडार मौजूद हैं। इसके बावजूद, देश की बहुसंख्यक आबादी गरीबी और बुनियादी सुविधाओं के आभाव में जीने को मजबूर है क्योंकि खनिजों से होने वाली अकूत आय का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय विकास में लगने के बजाय भ्रष्टाचार और अवैध खनन सिंडिकेट्स की तिजोरियों में चला जाता है। अनियंत्रित और अवैध खनन के कारण कांगो के ग्रामीण इलाकों में पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है, नदियां जहरीली हो रही हैं और उपजाऊ जमीनें बंजर होती जा रही हैं। स्थानीय नागरिकों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा लगातार यह आवाज उठाई जा रही थी कि बाहरी कंपनियां स्थानीय कानूनों और सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखाकर प्राकृतिक संपदा का अंधाधुंध दोहन कर रही हैं। सरकार द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई को स्थानीय जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इस तरह के कड़े कदमों से देश की संप्रभुता सुरक्षित होगी और खनिजों की चोरी पर लगाम लगेगी।

अंतरराष्ट्रीय खनिज कूटनीति और अफ्रीका में चीन के बढ़ते प्रभाव पर बड़ा झटका

इस पूरी घटना ने अफ्रीका और चीन के बीच के व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों पर भी एक गहरा सवालिया निशान लगा दिया है। पिछले कुछ दशकों में चीन ने अफ्रीकी देशों के बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश करने के बहाने वहां के खनिज बाजारों पर एकछत्र कब्जा जमाने की कोशिश की है। कई मामलों में यह आरोप भी लगते रहे हैं कि चीनी कंपनियां स्थानीय कानूनों की परवाह किए बिना प्राकृतिक संसाधनों को चूसने का काम कर रही हैं। कांगो सरकार द्वारा की गई यह कड़ी कार्रवाई अन्य अफ्रीकी देशों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण पेश कर रही है कि वे अपनी प्राकृतिक संपदा की रक्षा के लिए विदेशी ताकतों के आगे झुकने के बजाय कड़े कानूनी फैसले ले सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या कांगो सरकार इन गिरफ्तार किए गए चीनी नागरिकों और कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाकर उन्हें वापस भेजती है या फिर उन पर स्थानीय अदालतों में मुकदमा चलाया जाता है। बहरहाल, इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अफ्रीकी देश अब अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों के प्रति पहले से कहीं अधिक सतर्क और आक्रामक हो चुके हैं।