रिमोट, पेंचकस से आलू तक, इंग्लैंड के डॉक्टरों ने लोगों के रेक्टम से निकाली हजारों चीजें

रिमोट, पेंचकस से आलू तक, इंग्लैंड के डॉक्टरों ने लोगों के रेक्टम से निकाली हजारों चीजें

चिकित्सा की दुनिया में आए दिन ऐसे कई अजीबोगरीब मामले सामने आते हैं जिन्हें सुनकर आम इंसान का सिर चकरा जाए। हाल ही में इंग्लैंड की स्वास्थ्य सेवाओं और नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अस्पतालों से जुड़े एक चौंकाने वाले मेडिकल डेटा ने पूरी दुनिया के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को हैरान कर दिया है। सामने आए इस ताजा आंकड़े के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों के दौरान इंग्लैंड के विभिन्न अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड्स में ऐसे हजारों मामले दर्ज किए गए हैं जहां लोगों के शरीर के पिछले हिस्से यानी रेक्टम (गुदा मार्ग) से बेहद अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाली वस्तुएं निकाली गईं। इस सूची में केवल छोटे-मोटे खिलौने या घरेलू सामान ही शामिल नहीं हैं, बल्कि टीवी का रिमोट, लोहे के पेंचकस, कांच के गिलास, और यहां तक कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले कच्चे आलू जैसी चीजें भी शामिल हैं। जब डॉक्टरों ने इन मरीजों का इलाज किया और उनके शरीर से इन वस्तुओं को सुरक्षित बाहर निकाला, तो उनके अपने होश उड़ गए। इस तरह की घटनाओं के लगातार सामने आने के बाद अब मेडिकल एक्सपर्ट्स और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच इस बात पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर लोग क्यों इस तरह के खतरनाक और अजीबोगरीब तरीकों से अपने शरीर को जोखिम में डालते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस सनसनीखेज रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे हुए हैं और डॉक्टरों का इस बारे में क्या कहना है।

अस्पतालों के आधिकारिक डेटा से हुआ इस अजीबोगरीब ट्रेंड का बड़ा खुलासा

इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अस्पतालों से प्राप्त हुए मेडिकल रिकॉर्ड्स और आपातकालीन कक्ष (Emergency Department) के आंकड़ों का जब गहराई से विश्लेषण किया गया, तो यह बात खुलकर सामने आई कि रेक्टम में अजीब वस्तुएं फंसने के मामलों में कोई कमी नहीं आ रही है, बल्कि हर साल इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक से अधिक समय में हजारों ऐसे मरीज अस्पतालों की इमरजेंसी में पहुंचे जिन्हें तत्काल सर्जरी या विशेष चिकित्सा प्रक्रिया की जरूरत पड़ी क्योंकि उनके शरीर के अंदर बाहरी वस्तुएं फंस चुकी थीं। इन मरीजों में अधिकांश संख्या पुरुषों की है, जिनकी उम्र अलग-अलग वर्गों से ताल्लुक रखती है। डॉक्टरों के लिए यह स्थिति हर बार एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है क्योंकि जरा सी भी लापरवाही या देरी मरीज की जान के लिए घातक साबित हो सकती है। इन मामलों में इस्तेमाल होने वाली सर्जरी बेहद जटिल होती है क्योंकि कई बार वस्तुएं इतनी गहराई तक चली जाती हैं कि आंतों के फटने या अंदरूनी रक्तस्राव का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। अस्पतालों के इस डेटा ने यह भी उजागर किया है कि लोग शर्मिंदगी के कारण कई बार शुरुआती दौर में डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं, जिससे उनकी स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है।

घर के सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तक: क्या-क्या चीजें पहुंचीं मरीजों के शरीर के अंदर

इस मेडिकल रिपोर्ट में जिस लंबी फेहरिस्त का जिक्र किया गया है, उसे पढ़कर किसी का भी हैरान होना लाजिमी है। डॉक्टरों द्वारा मरीजों के शरीर से निकाली गई वस्तुओं में घरेलू सामान, टूल्स और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की भरमार है। रिपोर्ट के मुताबिक कई मामलों में मरीजों के रेक्टम से टीवी या एसी के रिमोट कंट्रोल, लोहे और प्लास्टिक के पेंचकस (screwdrivers), हथौड़े के छोटे हिस्से, मेटल की रॉड, कांच की बोतलें, परफ्यूम के डिब्बे, बैटरी और यहां तक कि खाने-पीने की चीजें जैसे कि कच्चे आलू, खीरे और ककड़ी तक बरामद किए गए हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक और रबर से बने सेक्स टॉयज और घरेलू उपयोग के बर्तन भी इस अजीब सूची का हिस्सा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब ये चीजें शरीर के अंदर जाती हैं तो वैक्यूम या आंतरिक मांसपेशियों के संकुचन के कारण वे अंदर ही फंस जाती हैं और लाख कोशिशों के बाद भी बाहर नहीं निकल पाती हैं। इसके बाद मरीजों को असहनीय दर्द और संक्रमण की शिकायत के साथ मजबूरी में अस्पताल के आपातकालीन विभाग का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जहां सर्जिकल टीम को विशेष उपकरणों की मदद से इन्हें बाहर निकालना पड़ता है।

मेडिकल एक्सपर्ट्स और मनोवैज्ञानिकों की नजर में इस प्रवृत्ति के पीछे की मुख्य वजहें

इस तरह के मामलों के लगातार सामने आने के बाद मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों ने इस पर गहरी चिंता जताई है और इसके पीछे के कारणों को समझने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का व्यवहार अक्सर यौन जिज्ञासा, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं या असावधानी के कारण उत्पन्न होता है। कई बार लोग इंटरनेट पर उपलब्ध बिना डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह वाले खतरनाक ट्रेंड्स या उत्तेजना की तलाश में इस तरह के जोखिम भरे कदम उठा लेते हैं, जिसके परिणाम बेहद भयानक होते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में यह देखा गया है कि लोग मदिरा या अन्य नशीले पदार्थों के अत्यधिक नशे में होने के कारण अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं और इस तरह की दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। मनोचिकित्सकों का यह भी कहना है कि समाज में इस विषय पर खुलकर बात न किए जाने के कारण लोग अपनी जिज्ञासाओं या समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए गलत और खतरनाक रास्ते अपना बैठते हैं, जो अंततः उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञों ने अपील की है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की झिझक या शर्म महसूस किए बिना तुरंत पेशेवर चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए ताकि समय रहते जानलेवा खतरों से बचा जा सके।

अस्पताल प्रशासन की चेतावनी और इस तरह की घटनाओं से बचने के उपाय

इस पूरी घटना के सामने आने के बाद इंग्लैंड के प्रमुख अस्पतालों और स्वास्थ्य संगठनों ने जनता के लिए एक चेतावनी और जागरूकता संदेश जारी किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि शरीर के संवेदनशील हिस्सों में किसी भी प्रकार की बाहरी या गैर-चिकित्सकीय वस्तुओं का प्रयोग करना अत्यधिक खतरनाक है और इससे आंतों में छेद होने, पेरिटोनिटिस (गंभीर संक्रमण) और सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं। अस्पतालों ने लोगों से आग्रह किया है कि वे इस तरह के किसी भी जोखिम भरे प्रयोग से पूरी तरह दूर रहें। इसके साथ ही आपातकालीन विभागों में तैनात मेडिकल स्टाफ को इस प्रकार के मामलों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि बिना किसी समय को गंवाए मरीजों की जान बचाई जा सके। यह सनसनीखेज रिपोर्ट न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक अध्ययन का विषय है, बल्कि यह आम जनता के लिए भी एक बड़ा सबक है कि छोटी सी लापरवाही या क्षणिक जिज्ञासा किस तरह किसी के जीवन को संकट में डाल सकती है।