उत्तराखंड: बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स की शूटिंग से बढ़ रही पहचान
उत्तर भारत की गोद में बसा देवभूमि उत्तराखंड आज के समय में केवल धार्मिक पर्यटन और चार धाम यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा शूटिंग हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। बर्फीली चोटियों, कल-कल बहती नदियों, देवदार के ऊंचे-ऊंचे घने जंगलों और प्राचीन पहाड़ों से घिरे इस राज्य की मनमोहक वादियां इन दिनों सिनेमाई दुनिया के बड़े दिग्गजों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। पारंपरिक रूप से मुंबई, गोवा या दक्षिण भारत के कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रहने वाली फिल्म इंडस्ट्री अब उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर दोहन कर रही है। स्थिति यह है कि हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा के बड़े-बड़े बैनर अपनी फिल्मों, वेब सीरीज, विज्ञापनों और संगीत वीडियो की शूटिंग के लिए लगातार उत्तराखंड का रुख कर रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल राज्य की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को वैश्विक स्तर पर एक नई ऊंचाई दी है, बल्कि यहां की आर्थिकी और पर्यटन क्षेत्र को भी एक अभूतपूर्व गति प्रदान की है। सरकार द्वारा लाई गई फिल्म अनुकूल नीतियों के कारण अब शूटिंग की अनुमति मिलने की प्रक्रिया भी काफी सरल हो गई है, जिससे निर्माता बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के यहां अपने प्रोजेक्ट्स को गति दे रहे हैं।
मसूरी, नैनीताल, औली और पिथौरागढ़ जैसे खूबसूरत स्थल बन रहे हैं निर्देशकों की पहली पसंद
उत्तराखंड के अलग-अलग जिले अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट के कारण फिल्म निर्माताओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। 'पहाड़ों की रानी' के नाम से मशहूर मसूरी एक बार फिर से क्लासिक और आधुनिक दोनों प्रकार की फिल्मों के लिए निर्देशकों की पहली पसंद बनी हुई है। यहां के औपनिवेशिककालीन भवन, माल रोड की सर्पीली सड़कें और बादलों के आगोश में लिपटे पहाड़ कैमरे के फ्रेम में बेहद खूबसूरत नजर आते हैं। इसी तरह, झीलों के शहर नैनीताल की शांत झीलें और चारों तरफ फैला हरियाली भरा वातावरण रोमांटिक दृश्यों के फिल्मांकन के लिए निर्माताओं का पसंदीदा ठिकाना है। दूसरी ओर, गढ़वाल मंडल में स्थित औली की बर्फ से ढकी ढलानें और स्कीइंग रिसॉर्ट्स सर्दियों के एक्शन दृश्यों और गानों की शूटिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़, मुनस्यारी और अल्मोड़ा जैसे दुर्गम और सुंदर इलाके भी अब छुपे हुए रत्नों की तरह फिल्म जगत के सामने आ रहे हैं। इन जगहों पर शूटिंग होने से न केवल पारंपरिक पर्यटन स्थलों पर भीड़ का दबाव कम होता है, बल्कि उन अनछुए इलाकों में भी पर्यटन का विकास होता है जहां तक पहले पर्यटकों की पहुंच बहुत सीमित थी। उत्तराखंड की इस भौगोलिक विविधता ने फिल्म निर्देशकों को अपनी रचनात्मकता को खुलकर पन्नों से पर्दे पर उतारने का एक व्यापक कैनवास उपलब्ध करा दिया है।
राज्य सरकार की उदार फिल्म नीति और सिंगल विंडो सिस्टम से मिल रहा बड़ा बढ़ावा
उत्तराखंड में फिल्म निर्माण के इस ऐतिहासिक दौर के पीछे राज्य सरकार की दूरदर्शी और उदार फिल्म नीति का बहुत बड़ा योगदान है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन विभाग के प्रयासों के परिणामस्वरूप सरकार ने एक ऐसा 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम' यानी एकल खिड़की प्रणाली लागू की है, जिसके तहत फिल्म मेकर्स को शूटिंग की अनुमति प्राप्त करने के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। ऑनलाइन माध्यम से कुछ ही दिनों में तमाम अनुमतियां आसानी से मिल जाती हैं, जिससे निर्माताओं का समय और धन दोनों की भारी बचत होती है। इसके साथ ही, उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद (UFDVB) की ओर से स्थानीय स्तर पर शूटिंग करने वाले फिल्म निर्माताओं को कई प्रकार की आर्थिक सब्सिडी, टैक्स में छूट और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की जा रही है। यदि कोई निर्माता अपनी फिल्म में स्थानीय कलाकारों को पर्याप्त अवसर देता है या उत्तराखंड के सांस्कृतिक इतिहास को प्रमोट करता है, तो उसे सरकार की ओर से विशेष अनुदान भी मिलता है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, स्थानीय पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग और बेहतर सड़क तथा हवाई संपर्क ने मिलकर राज्य के भीतर फिल्म यूनिट्स के लिए एक अनुकूल और सुरक्षित माहौल तैयार कर दिया है, जिससे बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस बेझिझक यहां करोड़ों के बजट वाले प्रोजेक्ट्स लेकर आ रहे हैं।
स्थानीय युवाओं और कलाकारों के लिए रोजगार के नए रास्ते और आर्थिकी को मिल रही मजबूती
फिल्मों की शूटिंग का यह बढ़ता चलन उत्तराखंड के स्थानीय निवासियों, विशेषकर युवाओं और कलाकारों के लिए वरदान साबित हो रहा है। जब कोई बड़ी फिल्म यूनिट किसी शहर या गांव में शूटिंग के लिए पहुंचती है, तो वहां होटल, होमस्टे, ट्रांसपोर्ट, खान-पान और केटरिंग सेवाओं की मांग रातों-रात कई गुना बढ़ जाती है। इससे होटल व्यवसायियों से लेकर छोटे दुकानदारों और टैक्सी चालकों तक को सीधा और भारी आर्थिक लाभ पहुंचता है। इसके अलावा, फिल्म निर्माण से जुड़ी विभिन्न विधाओं जैसे कि प्रोडक्शन मैनेजमेंट, लाइट और कैमरा असिस्टेंट, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग, मेकअप और क्राउड मैनेजमेंट में स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उत्तराखंड के थियेटर कलाकारों और क्षेत्रीय रंगकर्मियों को भी इन बड़े बैनर की फिल्मों में अभिनय करने और अपनी कला का प्रदर्शन करने का शानदार मंच मिल रहा है। कई युवा अब मुंबई जाने के बजाय अपने ही गृह राज्य में फिल्म निर्माण के तकनीकी पहलुओं को सीखकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर होमस्टे चलाने वाले लोग पर्यटकों और फिल्म क्रू के आने से अपनी आजीविका को बेहतर ढंग से चला पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण पलायन की समस्या पर भी प्रभावी ढंग से अंकुश लग रहा है।
भविष्य की संभावनाएं: ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में उभरता उत्तराखंड और सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका
आने वाले समय में उत्तराखंड फिल्म टूरिज्म के नक्शे पर दुनिया के सबसे बड़े और प्रमुख शूटिंग डेस्टिनेशंस में से एक के रूप में अपनी जगह पक्की करता हुआ दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार जिस तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है और फिल्म सिटी या स्टूडियो स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है, उससे भविष्य में स्थानीय स्तर पर ही स्थायी रोजगार के अवसरों में भारी इजाफा होगा। इन फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति, यहां के पारंपरिक लोक गीत, वाद्य यंत्र, खान-पान और वेशभूषा पूरी दुनिया के दर्शकों तक पहुंच रही है, जो एक प्रकार से राज्य के सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका निभा रहे हैं। जब दर्शक पर्दे पर कुमाऊनी और गढ़वाल की सुंदर वादियों को देखते हैं, तो वे व्यक्तिगत रूप से भी यहां घूमने के लिए आकर्षित होते हैं, जिससे सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा मिलता है। कुल मिलाकर, देवभूमि अब केवल पूजा-पाठ और ध्यान की भूमि तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह आधुनिक सिनेमाई सृजन, कला, संस्कृति और रचनात्मकता का एक जीवंत और प्रगतिशील केंद्र बन चुकी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए आर्थिक और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खोल रही है।