9 KM पैदल रास्ते से परेशान ग्रामीणों ने खुद काट डाली पहाड़ी, वीडियो वायरल होते ही CM धामी का बड़ा एक्शन

9 KM पैदल रास्ते से परेशान ग्रामीणों ने खुद काट डाली पहाड़ी, वीडियो वायरल होते ही CM धामी का बड़ा एक्शन

उत्तराखंड के सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क की आस लगाए ग्रामीणों के सब्र का बांध जब टूटा, तो उन्होंने सरकारी तंत्र की सुस्ती के आगे खुद अपने बाजुओं के दम पर रास्ता बनाने का बीड़ा उठा लिया। चमोली जनपद के कर्णप्रयाग विकासखंड अंतर्गत सकण्ड (स्कंद) गांव के बाशिंदों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए रोजाना करीब 9 किलोमीटर की बेहद कठिन और पथरीली पैदल चढ़ाई नापनी पड़ती थी।

लंबे समय से चल रही सड़क की मांग, विभागीय सर्वे और फाइलों में दबी प्रक्रियाओं के बावजूद जब धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हुआ, तो गांव के बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने खुद गैंती, फावड़े और कुदाल हाथ में थाम लिए और महज कुछ ही दिनों के भीतर लगभग 40 मीटर पहाड़ी काटकर कच्चा रास्ता तैयार कर दिया।

सोशल मीडिया पर गूंजी आवाज तो एक्शन में आए सीएम धामी

पहाड़ का सीना चीरकर खुद अपनी किस्मत संवारने में जुटे सकण्ड गांव के ग्रामीणों के श्रमदान की तस्वीरें और वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए, राजधानी देहरादून तक शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसका तत्काल व्यक्तिगत संज्ञान लिया। सीएम ने चमोली के संबंधित जिलाधिकारी को सीधे निर्देश जारी करते हुए कहा कि ग्रामीणों की सड़क से जुड़ी इस संवेदनशील समस्या का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निकाला जाए और विभागीय तालमेल के साथ तुरंत काम शुरू कराया जाए।

3 माह की सख्त डेडलाइन: अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे विकास का लाभ

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट लहजे में निर्देश दिए कि कागजी औपचारिकताओं में उलझने के बजाय सड़क निर्माण की धरातलीय कार्रवाई को अधिकतम तीन महीने के भीतर पूरा करने की दिशा में युद्धस्तर पर काम किया जाए। सीएम धामी ने जोर देकर कहा कि दूरस्थ पर्वतीय गांवों का समग्र विकास और ग्रामीणों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार का पहला दायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अमले को आम जनता के प्रति पूरी संवेदनशीलता और तत्परता दिखानी होगी, क्योंकि सरकार की नीतियों का असली मकसद विकास का लाभ गांव के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना है।

राजस्व, वन और PWD की संयुक्त टीम गांव पहुंची, प्रधान ने जताया आभार

मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद जिले का प्रशासनिक अमला तत्काल हरकत में आया। राजस्व विभाग, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की एक उच्चस्तरीय संयुक्त टीम ने फौरन दुर्गम सकण्ड गांव पहुंचकर मौके का तकनीकी और भौगोलिक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उन्हें भरोसा दिलाया कि सड़क निर्माण की फॉरेस्ट क्लीयरेंस और निर्माण प्रक्रिया को तीन माह की तय समयसीमा में अमलीजामा पहनाया जाएगा। मुख्यमंत्री के त्वरित एक्शन और अधिकारियों के गांव पहुंचते ही ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी ने ग्रामीणों की ओर से सीएम पुष्कर सिंह धामी और जिला प्रशासन का आभार जताया और कहा कि लंबे समय से उपेक्षित इस गांव के लिए यह फैसला संजीवनी साबित हुआ है।