भारतीय लोकतंत्र के सम्मान में आए 27 देश! विदेशी ताकतों के मंसूबों पर फिरा पानी
वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति और निर्विवाद साख का लोहा मनवाया है। दुनिया भर में भारतीय लोकतंत्र और उसकी निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को बदनाम करने की मंशा से रची जा रही साजिशों और प्रोपेगैंडा पर उस समय पानी फिर गया, जब दुनिया के 27 प्रमुख लोकतांत्रिक राष्ट्रों ने एकजुट होकर भारत की संप्रभुता और लोकतांत्रिक ढांचे का खुलकर समर्थन किया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी एजेंडा चलाने वाली विदेशी ताकतों और वैश्विक नैरेटिव गढ़ने वाली संस्थाओं को यह कड़ा और स्पष्ट संदेश गया है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जिसकी नींव यहां के 140 करोड़ नागरिकों का अटूट विश्वास है। इस ऐतिहासिक वैश्विक समर्थन ने साबित कर दिया है कि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या भ्रामक रिपोर्ट के दम पर भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल नहीं किया जा सकता।
27 शक्तिशाली देशों की एकजुटता: भारत की चुनाव प्रणाली और न्यायिक व्यवस्था पर जताया भरोसा
वैश्विक मंच पर आयोजित एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक के दौरान विश्व के 27 देशों के प्रतिनिधियों ने भारत में समय-समय पर होने वाले पारदर्शी चुनाव, मजबूत चुनाव आयोग और स्वतंत्र न्यायपालिका की भूरी-भूरी प्रशंसा की। इन देशों ने साझा बयान जारी करते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वहां की प्राचीन जीवनशैली और महान मूल्यों का हिस्सा है। पिछले कुछ समय से विदेशी मीडिया के कुछ हिस्सों और तथाकथित वैश्विक थिंक-टैंकों द्वारा भारत के आंतरिक मामलों को लेकर झूठी और प्रायोजित रिपोर्ट तैयार की जा रही थीं, ताकि भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को कमजोर किया जा सके। हालांकि, यूरोप, एशिया और अमेरिकी महाद्वीप के इन प्रमुख साझेदार देशों के आधिकारिक बयान ने उन सभी दुष्प्रचारों की धज्जियां उड़ा दी हैं और भारत के संवैधानिक ढांचे पर अपनी अटूट आस्था प्रकट की है।
विदेशी प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश: क्यों विफल हुई भारत विरोधी लॉबी?
हाल के वर्षों में वैश्विक पटल पर भारत की अर्थव्यवस्था, सैन्य ताकत और कूटनीतिक दबदबे का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। इसी बढ़ती ताकत से बौखलाई कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और विदेशी टूलकिट लॉबी लगातार भारत को एक कमजोर लोकतंत्र के रूप में चित्रित करने की फिराक में थीं। कभी प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक तो कभी धार्मिक स्वतंत्रता के फर्जी पैमानों को ढाल बनाकर भारत सरकार और उसकी संस्थाओं को घेरने की कोशिश की जाती रही है। लेकिन इस बार 27 देशों के राजनयिकों ने जमीनी हकीकत का निष्पक्ष आकलन करते हुए यह साफ कर दिया कि भारत में हर नागरिक को समान अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है। फर्जी आख्यानों और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टों की पोल खुलते ही भारत विरोधी लॉबी की सारी योजनाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं।
ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में उभरा भारत: रणनीतिक और कूटनीतिक जीत
27 देशों का यह अटूट समर्थन केवल लोकतंत्र की तारीफ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के प्रधानमंत्रियों, विदेश नीति के विशेषज्ञों और मजबूत कूटनीति की एक बड़ी रणनीतिक जीत है। भारत जिस तरह से 'ग्लोबल साउथ' यानी विकासशील और विकसित देशों के बीच एक मजबूत सेतु बनकर उभरा है, उसने पूरी दुनिया में उसके प्रति सम्मान को कई गुना बढ़ा दिया है। जी-20 की सफल अध्यक्षता और अंतरराष्ट्रीय संकटों के समय भारत द्वारा अपनाए गए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण रवैये ने दुनिया को यह अहसास कराया है कि वैश्विक स्थिरता के लिए एक मजबूत और लोकतांत्रिक भारत का होना बेहद अनिवार्य है। यही कारण है कि पश्चिमी देशों से लेकर मध्य पूर्व और पूर्वी एशिया के साझेदार देश भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को चुनौती देने वाले किसी भी प्रयास के खिलाफ चट्टान की तरह खड़े नजर आ रहे हैं।
140 करोड़ भारतीयों के विश्वास की जीत, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ा मान
इस कूटनीतिक सफलता पर देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों और नागरिकों ने खुशी व्यक्त की है। उनका मानना है कि जब देश के 140 करोड़ लोग पूरी निष्ठा के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और हर चुनाव में रिकॉर्ड मतदान करते हैं, तो वही असली भारत की ताकत बनती है। विदेशी धरती पर भारत के लोकतंत्र का यह डंका बजना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। भारत सरकार ने भी इस वैश्विक समर्थन का स्वागत करते हुए यह दोहराया है कि देश अपने आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का अनुचित बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं, विविधता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगा।