सऊदी-हूती युद्ध की आग में झुलसा बांग्लादेश, लाखों परिवारों पर टूटा आफत का पहाड़, पाकिस्तान वाला होगा हाल?
पश्चिम एशिया के सुलगते रणक्षेत्र से एक ऐसी दर्दनाक और खौफनाक खबर सामने आई है जिसने दक्षिण एशिया के देश बांग्लादेश की नींद उड़ा दी है। सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच चल रहे खूनी संघर्ष की आंच अब सीधे तौर पर विदेशी धरती पर मजदूरी और धार्मिक यात्रा के लिए गए आम नागरिकों तक पहुंच चुकी है। रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक भीषण मिसाइल हमले ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि हजारों प्रवासी परिवारों की जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है। इस तबाही को देखकर अब हर तरफ यह सवाल उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश का यह संकट आने वाले दिनों में पाकिस्तान जैसे देशों की तरह किसी बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक संकट का रूप लेने वाला है।
रियाद एयरपोर्ट पर हूती मिसाइल का कहर और बांग्लादेशियों का दर्द
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए एक घातक मिसाइल हमले ने भारी तबाही मचाई है। इस अचानक हुए हमले की चपेट में आने से कई बेकसूर लोग काल के गाल में समा गए, जिनमें बांग्लादेश के नागरिक भी शामिल थे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस दर्दनाक हादसे में दो से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों की चौखट पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मरने वालों में वे लोग भी शामिल थे जो उमराह की पवित्र यात्रा पर जाने के लिए ट्रांजिट में थे या फिर अपनी रोजी-रोटी कमाने के वास्ते खाड़ी देशों की यात्रा पर निकले थे। विस्फोट के ठीक पहले अपने परिवार से संपर्क साधने की कोशिश करने वाले इन प्रवासियों की आखिरी चीखें अब उनके गांवों में मातम बनकर गूंज रही हैं।
क्या पाकिस्तान की तरह आर्थिक और रणनीतिक दलदल में फंसेगा बांग्लादेश?
इस घटना के बाद से दक्षिण एशिया में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या खाड़ी के युद्ध में प्रवासियों की सुरक्षा का यह संकट बांग्लादेश को किसी गहरी मुसीबत में धकेल देगा। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की तर्ज पर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भी काफी हद तक मिडिल ईस्ट से आने वाले रेमिटेंस (विदेशी धन) पर टिकी हुई है। यदि सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह संघर्ष और अधिक व्यापक रूप लेता है, तो वहां काम कर रहे लाखों प्रवासियों की नौकरियां और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। पाकिस्तान पहले ही अपनी आंतरिक और बाहरी नीतियों के चलते पश्चिम एशिया के संघर्षों से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन बांग्लादेश के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती बन गई है क्योंकि उसके करोड़ों नागरिक खाड़ी देशों में अपनी आजीविका चला रहे हैं।
खाड़ी देशों में सुलगती बारूदी सुरंग और प्रवासियों के सामने रोजी-रोटी का संकट
सऊदी अरब की जमीन पर हूती विद्रोहियों के लगातार बढ़ते हमले इस बात का प्रमाण हैं कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था कितनी ज्यादा नाजुक हो चुकी है। ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा सऊदी अरब की मदद के लिए लड़ाकू विमान और सैन्य संसाधन भेजने के बावजूद हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस बारूदी माहौल के बीच सबसे बड़ा संकट उन गरीब मजदूरों और प्रवासियों के सामने खड़ा हो गया है जो अपने बूढ़े मां-बाप और छोटे बच्चों का पेट पालने के लिए हजारों मील दूर की यात्रा तय करते हैं। रियाद हमले के बाद घायलों का इलाज भले ही स्थानीय अस्पतालों में बेहतरीन तरीके से चल रहा हो, लेकिन परिवारों के दिलों में बैठा यह डर आसानी से कम होने वाला नहीं है कि अगली आफत कब और किस रूप में टूट पड़े।
अंतहीन होती इस जंग का क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति पर असर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश सरकार ने इस कायरतापूर्ण और हिंसक हमले की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए सऊदी सरकार के प्रति पूरी एकजुटता व्यक्त की है। कूटनीतिक स्तर पर भले ही दोषियों के खिलाफ आवाज उठाई जा रही हो, लेकिन जमीन पर स्थिति यह है कि यमन का गृहयुद्ध अब पूरे क्षेत्र के लिए एक लाइलाज नासूर बनता जा रहा है। जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय हूती विद्रोहियों और उनके समर्थकों पर लगाम कसने में पूरी तरह कामयाब नहीं होता, तब तक सऊदी अरब की सीमा पर काम करने वाले हर एक विदेशी नागरिक की सांसें अटकी रहेंगी। इस खौफनाक मंजर ने यह साबित कर दिया है कि युद्ध की आग चाहे कहीं भी सुलग्रे, उसकी सबसे पहली और भयानक कीमत हमेशा आम और गरीब इंसान को ही चुकानी पड़ती है।