अमेरिका में फिर खून-खराबा: पेंसिल्वेनिया में अंधाधुंध फायरिंग में 9 की मौत; हमलावर ने भी खुद को उड़ाया

अमेरिका में फिर खून-खराबा: पेंसिल्वेनिया में अंधाधुंध फायरिंग में 9 की मौत; हमलावर ने भी खुद को उड़ाया

दुनिया के सबसे ताकतवर और विकसित देश कहे जाने वाले अमेरिका की जमीन पर एक बार फिर से बंदूकों की गूंज और मासूमों के खून से धरती लाल हो गई है। गन कल्चर और हथियारों की खुली छूट का दंश झेल रहे अमेरिका में हिंसक वारदातों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला अमेरिकी राज्य पेंसिल्वेनिया से सामने आया है, जहां एक सनकी हमलावर ने शांतिपूर्ण माहौल को पल भर में मातम में बदल दिया। अंधाधुंध फायरिंग की इस खौफनाक घटना ने एक बार फिर पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। छुट्टी के दिन या सामान्य कामकाज के दौरान हुई इस अचानक हिंसा ने वहां के स्थानीय नागरिकों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजा वह इलाका कुछ ही पलों में जंग का मैदान बन गया, जहां चारों तरफ अपनों की लाशें और खून बिखरा पड़ा था। इस वीभत्स घटना ने अमेरिका में सुरक्षा व्यवस्था और गन कंट्रोल कानूनों पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब वहां के हुक्मरां के पास भी नहीं है।

अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्राया इलाका, मची भगदड़

घटना के समय पेंसिल्वेनिया के उस व्यस्त इलाके में लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे या सुकून के पल बिता रहे थे। किसी को भी इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में मौत बनकर एक शख्स उनकी जिंदगियों पर कहर बनकर टूटने वाला है। अचानक से अत्याधुनिक हथियारों से लैस एक हमलावर ने भीड़भाड़ वाले इलाके में प्रवेश किया और बिना किसी चेतावनी या दया भाव के ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। अंधाधुंध फायरिंग की इस आवाज को सुनते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे, लेकिन हमलावर के निशाने पर आए लोग संभल तक नहीं पाए। दुकानों, सड़कों और खुले परिसरों में हर तरफ चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए कुर्सियों के पीछे, गाड़ियों की आड़ में और बंद कमरों में छुपने को मजबूर हो गए। कुछ ही मिनटों के भीतर उस हंसते-खेलते इलाके को खून के तालाब में तब्दील कर दिया गया, जिससे हर देखने वाले की रूह कांप उठी।

9 बेकसूर लोगों की मौके पर ही मौत, कई गंभीर रूप से घायल

इस अंधाधुंध और क्रूर गोलीबारी के तांडव में कुल 9 मासूम और बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। मरने वालों में विभिन्न उम्र के लोग शामिल हैं, जिनकी अचानक हुई मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इसके अलावा, इस हिंसक घटना में कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम घायलों की जान बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही है, और कई घायलों की हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। जैसे ही इस भीषण नरसंहार की खबर मृतकों के परिजनों तक पहुंची, अस्पतालों और घटनास्थल के बाहर कोहराम मच गया। अपनों की सलामती की दुआ कर रहे परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अमेरिका में आए दिन होने वाली इस तरह की मास शूटिंग की घटनाओं ने अब नागरिकों के धैर्य को जवाब दे दिया है, और लोग खुलकर पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक अमेरिका की सड़कों पर यूं ही बेकसूर लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।

खुद को बचाने के चक्कर में हमलावर ने अंत में खुद को भी उड़ाया

जब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को इस घटना की सूचना मिली, तो उन्होंने तुरंत भारी दल-बल के साथ घटनास्थल की ओर कूच किया। अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों और पुलिस ने इलाके को चारों तरफ से घेर लिया और मोर्चा संभाल लिया। खुद को पुलिस और सुरक्षा बलों से पूरी तरह घिर चुका देख, उस कातिल और सनकी हमलावर ने भागने का कोई रास्ता न पाकर बेहद खौफनाक कदम उठाया। उसने किसी की गिरफ्त में आने या कानून का सामना करने के डर से अपनी ही बंदूक अपनी तरफ मोड़ ली और खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। हमलावर के खुद को उड़ा लेने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली, लेकिन इस बात से पर्दा उठाना अभी बाकी है कि आखिर इस नरसंहार के पीछे उसकी असल मानसिक स्थिति या कोई गहरी साजिश थी या नहीं। पुलिस अब घटनास्थल से बरामद सुरागों, सीसीटीवी फुटेज और हमलावर के पुराने रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी है ताकि इस खूनी खेल की हर एक परत को उजागर किया जा सके।

अमेरिकी समाज में बढ़ता गन कल्चर और राजनीतिक दलों की बेबसी

अमेरिका में गन कल्चर यानी बंदूकों का खुलेआम खरीदा और बेचा जाना हमेशा से एक ज्वलंत और राजनीतिक रूप से विवादास्पद मुद्दा रहा है। संविधान के दूसरे संशोधन के तहत वहां नागरिकों को आत्मरक्षा के लिए हथियार रखने का अधिकार मिला हुआ है, लेकिन यही अधिकार अब अमेरिका के लिए एक अभिशाप बनता जा रहा है। मानसिक रूप से अस्वस्थ या आपराधिक प्रवृत्ति के लोग आसानी से घातक असॉल्ट राइफलें और हथियार हासिल कर लेते हैं, और फिर इसी तरह के खूनी नरसंहार को अंजाम देते हैं। पेंसिल्वेनिया की यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है; इससे पहले भी स्कूलों, मॉल, सुपरमार्केट और चर्चों में ऐसी दर्जनों मास शूटिंग की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें सैंकड़ों बेकसूर अपनी जान गंवा चुके हैं। हर बड़ी घटना के बाद राजनेताओं द्वारा कड़े गन कंट्रोल कानूनों को लाने के बड़े-बड़े वादे और शोक संदेश जारी किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद लॉबी के दबाव में मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं

घटना के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति और पेंसिल्वेनिया के गवर्नर ने इस निर्मम हत्याखंड की कड़ी निंदा करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। स्थानीय प्रशासन ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद कर दिया है, ताकि किसी भी तरह की अन्य अफवाह या खतरे से निपटा जा सके। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस सनकी हमलावर का संबंध किसी चरमपंथी संगठन से था या यह किसी व्यक्तिगत रंजिश और मानसिक कुंठा का नतीजा था। बहरहाल, इस खौफनाक घटना ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है और यह साबित कर दिया है कि आधुनिक हथियारों की खुली पहुंच इंसानी जिंदगी के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुकी है।