मिशिगन का अब्दुल छोड़ो... इन 4 जगहों से मिले ट्रंप को सबसे गहरे घाव, इतिहास-भूगोल सब बिगड़ गया!
अमेरिका की राजनीति में जब भी चुनावों के नतीजे आते हैं, तो हार-जीत के समीकरणों को लेकर तमाम तरह के विश्लेषण शुरू हो जाते हैं। हालिया अमेरिकी चुनावों में जैसे ही नतीजों की तस्वीर साफ हुई, हर तरफ मिशिगन के मुस्लिम मतदाताओं यानी 'अब्दुल फैक्टर' की चर्चा छिड़ गई। लेकिन पर्दे के पीछे की असली और चौंकाने वाली कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। जमीनी राजनीतिक आंकड़ों और वोटिंग पैटर्न का बारीक विश्लेषण करें तो साफ पता चलता है कि केवल मिशिगन ही नहीं, बल्कि चार ऐसी अन्य प्रमुख राजनीतिक जमीनें और वोट बैंक रहे हैं, जिन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी को ऐसा करारा झटका दिया है जिसकी भरपाई होना नामुमकिन सा लगता है। इन चार मोर्चों पर मिले जख्मों ने ट्रंप के पूरे राजनीतिक भविष्य का इतिहास और भूगोल बिगाड़ कर रख दिया है।
#1 suburban middle class white voters who completely rejected trump brand of politics
अमेरिकी चुनावों में दशकों से सबअर्बन यानी उपनगरीय इलाकों में रहने वाला मध्यमवर्गीय श्वेत समुदाय रिपब्लिकन पार्टी का पारंपरिक और सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन इस बार पेंसिल्वेनिया, जॉर्जिया और विस्कॉन्सिन जैसे प्रमुख राज्यों के सबअर्बन इलाकों में बेहद अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिला। शिक्षित और मध्यमवर्गीय श्वेत मतदाताओं, विशेष रूप से महिलाओं ने ट्रंप की उग्र और विभाजनकारी बयानबाजी से किनारा कर लिया। बढ़ती महंगाई, बंदूक नियंत्रण कानून और बच्चों की शिक्षा जैसे अहम मुद्दों पर परेशान इस वोट बैंक ने शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का हाथ थामा। सबअर्बन इलाकों के इस एकतरफा बदलाव ने ट्रंप की चुनावी रणनीति की रीढ़ की हड्डी ही तोड़ दी।
#1 young gen z voters and university campuses that turned into democratic strongholds
दूसरा सबसे बड़ा प्रहार ट्रंप खेमे पर अमेरिकी युवाओं यानी 'जनरेशन जी' (Gen Z) और यूनिवर्सिटी कैंपस से आया है। जलवायु परिवर्तन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समलैंगिक अधिकार और लोकतंत्र के भविष्य को लेकर बेहद संवेदनशील युवा पीढ़ी ने इस चुनाव में इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया। एरिज़ोना, मिशिगन और नेवादा जैसे राज्यों के विश्वविद्यालय परिसरों में पोलिंग बूथों पर युवाओं की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। इस युवा वोट बैंक ने ट्रंप की कट्टरपंथी सोच और रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। युवाओं के इस भारी और संगठित मतदान ने कई ऐसे राज्यों में चुनावी पासा पलट दिया, जहां रिपब्लिकन उम्मीदवार अपनी जीत पक्की मानकर चल रहे थे।
#1 independent voters in swing states who dealt a decisive blow to the republican party
अमेरिका के राजनीतिक समर में निर्दलीय यानी 'इंडिपेंडेंट' मतदाता हमेशा से किंगमेकर की भूमिका निभाते रहे हैं। किसी भी चुनाव का अंतिम नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि ये अनिर्णीत मतदाता किस ओर झुकते हैं। पेंसिल्वेनिया, विस्कॉन्सिन और जॉर्जिया जैसे सबसे अहम स्विंग स्टेट्स में निर्दलीय मतदाताओं ने इस बार ट्रंप के बजाए स्थिरता और कूटनीतिक संतुलन को चुना। चुनाव आयोग और एक्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक इंडिपेंडेंट वोटर्स ने रिपब्लिकन पार्टी के बजाय अन्य विकल्प पर अपना भरोसा जताया। ट्रंप का आक्रामक रवैया और संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाना इन निष्पक्ष मतदाताओं को बिल्कुल पसंद नहीं आया, जिससे ट्रंप को सबसे गहरी चोट पहुंची।
#1 working class and union members who turned their backs on trump promises
ट्रंप की राजनीति का सबसे बड़ा स्तंभ अमेरिका का 'ब्लू कॉलर' यानी कामकाजी वर्ग और औद्योगिक क्षेत्रों के मजदूर संघ रहे हैं। 2016 के चुनाव में इसी वर्ग के दम पर ट्रंप ने अप्रत्याशित जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार विस्कॉन्सिन, मिशिगन और ओहियो के ऑटोमोबाइल सेक्टर तथा निर्माण उद्योग से जुड़े मजदूर वर्ग का ट्रंप के दावों से पूरी तरह मोहभंग हो गया। कारखानों की बदहाली, नौकरियों की अनिश्चितता और आर्थिक तंगी से जूझ रहे यूनियन कार्यकर्ताओं ने माना कि ट्रंप के वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित रहे। जब मजदूर वर्ग ने अपनी निष्ठा बदली और डेमोक्रेटिक खेमे का रुख किया, तो रिपब्लिकन पार्टी का 'रस्ट बेल्ट' का किला पूरी तरह से ध्वस्त हो गया।
#1 historic lesson from these election outcomes and future of american democratic political landscape
इन चुनावों के नतीजों ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि अमेरिकी मतदाता अब केवल हवा-हवाई दावों और भावनात्मक मुद्दों के बहकावे में आने वाला नहीं है। केवल मिशिगन के अब्दुल या किसी एक वर्ग को अपनी हार का जिम्मेदार ठहराना ट्रंप खेमे के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक भूल साबित होगा। इन चार मोर्चों पर मिली ऐतिहासिक हार ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी एक नए असंतोष और आत्ममंथन को जन्म दे दिया है। अमेरिकी राजनीति अब उस मुकाम पर आ पहुंची है जहां ध्रुवीकरण की राजनीति के बजाय जमीनी मुद्दों, विकास और सामाजिक सौहार्द को तरजीह दी जा रही है, जो भविष्य के राष्ट्रपति चुनावों के लिए भी एक बड़ा मार्गदर्शक साबित होगा।