अमेरिकी सीनेट में रचा गया इतिहास: पहले मुस्लिम सीनेटर बने अब्दुल अल-सैयद, भारत से है खास रिश्ता
अमेरिकी राजनीति में एक नया इतिहास दर्ज हो गया है। देश की संसद के उच्च सदन (सीनेट) में पहली बार किसी मुस्लिम नेता ने अपनी जगह पक्की की है। डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील चेहरे और पेशे से डॉक्टर अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन सीट पर कांटे की टक्कर में रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज उम्मीदवार माइक रोजर्स को करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी सीनेट पर अपना राजनीतिक दबदबा और नियंत्रण एक बार फिर साबित कर दिया है।
अपनी ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए भावुक अब्दुल अल-सैयद ने जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मिशिगन के लोगों ने उन्हें सिर्फ अपने घरों में ही नहीं, बल्कि चर्चों और सिनेगॉग (यहूदी प्रार्थना स्थलों) तक में पूरा मान-सम्मान दिया। उन्होंने बताया कि यह जीत उस डेढ़ साल लंबे जमीनी अभियान का परिणाम है, जिसे उन्होंने मिशिगन के बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के छोटे कस्बों तक लगातार चलाया। राजनीतिक संघर्ष के सबसे कठिन दौर में मतदाताओं का यही भरोसा उनकी सबसे बड़ी ढाल और ताकत बना।
अब्दुल अल-सैयद का भारत से गहरा नाता
अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने वाले अब्दुल अल-सैयद का भारत से भी बेहद गहरा और आत्मीय नाता है। उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू पेशे से मनोचिकित्सक हैं और उनका परिवार मूल रूप से कर्नाटक के मंगलुरु से करीब 140 किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्र से संबंध रखता है। सारा के दादा शमशुद्दीन मैसूर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीडी जत्ती की सरकार में वित्त उप-मंत्री की अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
मिशिगन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान मिले रोड्स स्कॉलर अब्दुल अक्सर अपनी दक्षिण भारतीय ससुराल की संस्कृति की खुलकर तारीफ करते हैं। वे खुद भी गर्व से कहते हैं कि दो दशक के इस वैवाहिक रिश्ते के बाद वे भारतीय संस्कृति में इतने रच-बस गए हैं कि शायद अरबी पहचान से ज्यादा उनके भीतर भारतीयता बसी है।
यह चुनावी मुकाबला बेहद तनावपूर्ण और व्यक्तिगत हमलों से भरा रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों ने चुनाव प्रचार के दौरान कई बार अल-सैयद के नाम और धार्मिक पहचान को सीधे निशाने पर लिया। यहां तक कि उन पर भड़काऊ आरोप लगाते हुए संसद में जाने से पहले मेटल डिटेक्टर से जांच कराने जैसे विवादास्पद बयान भी दिए गए। इन व्यक्तिगत हमलों का संयम से जवाब देते हुए अल-सैयद ने महंगाई, गैस और किराने के बढ़ते खर्च जैसे बुनियादी मुद्दों को आगे रखा और जनता को बांटने की राजनीति को सीधे नकार दिया। ट्रंप के करीबी और पूर्व कांग्रेस सदस्य रहे माइक रोजर्स को हराकर सीनेट पहुंचे अल-सैयद ने इससे पहले डेमोक्रेटिक प्राइमरी में अपनी ही पार्टी की पसंदीदा नेता हेली स्टीवंस को हराकर अपनी सियासी ताकत का लोहा मनवाया था।