ईरान पर फिर सैन्य हमले की तैयारी में अमेरिका? राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए सख्त संकेत

ईरान पर फिर सैन्य हमले की तैयारी में अमेरिका? राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए सख्त संकेत

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स इस रविवार से ईरान के खिलाफ अपने सैन्य हमले दोबारा शुरू कर सकता है। 28 फरवरी से भड़के इस भीषण संघर्ष को थामने के लिए चल रही शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। फ्लोरिडा में मतदान के बाद मीडिया से मुखातिब 80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने अपने प्रशासन की आक्रामक रणनीति का बचाव करते हुए अमेरिकी सेना की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने दो टूक कहा कि तेहरान समझौता तो करना चाहता है, लेकिन असली चुनौती यह है कि क्या वे अपनी जुबान पर टिके रहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनकी नौसेना और वायुसेना ने ईरान के तमाम लड़ाकू विमानों को मार गिराया है, 259 जहाज समुद्र में डुबो दिए हैं और अब ईरान सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से जूझ रहा है।

यह सख्त रुख ट्रंप द्वारा ईरान को एक और 'छोटे एपिक फ्यूरी' की चेतावनी देने के ठीक बाद सामने आया है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत फरवरी में अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया था। इससे पहले तुर्की में तैनात अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने भी वीकेंड पर हमलों के दोबारा शुरू होने की आशंका जताई थी। अमेरिका की प्रमुख शर्त है कि तेहरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को तुरंत त्यागे और रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए बहाल करे, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। हालांकि, ईरान ने इन दोनों ही मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है।

इस गतिरोध को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया था। उन्होंने ईरानी नेतृत्व से संवर्धित यूरेनियम सौंपने का आग्रह किया, जिसे इस्लामिक गणराज्य ने पूरी तरह ठुकरा दिया। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए संदेश भेजा था कि यदि अमेरिका अपनी आर्थिक व नौसैनिक नाकाबंदी हटा ले, तो वह होर्मुज जलमार्ग को खोलने पर विचार कर सकता है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, वहीं तेहरान भी नाकाबंदी के बदले जलमार्ग के किसी समझौते को स्वीकार करने से पीछे हट गया है। किसी भी पक्ष द्वारा नरमी न दिखाने से पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।