‘मौत के मंत्री इस्तीफा दो’, ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ गए यहां के लोग?
देश-विदेश के राजनीतिक गलियारों से कई बार ऐसे विरोध प्रदर्शन और नारे देखने को मिलते हैं जो सीधे हुक्मरानों की नींव हिलाकर रख देते हैं। इन दिनों एक पड़ोसी देश की राजधानी और प्रमुख सड़कों पर कुछ ऐसा ही दिल दहला देने वाला और सरकार विरोधी उग्र नजारा देखने को मिल रहा है, जहां आम जनता और युवा वर्ग सड़कों पर उतरकर सीधे तौर पर देश के परिवहन मंत्री (Transport Minister) के खिलाफ आग उगल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां हैं जिन पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है—‘मौत के मंत्री इस्तीफा दो’। सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि वहां की जनता और सड़क परिवहन से जुड़े लोग अपने ही देश के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं और उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं। लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं, बेकाबू होती ट्रैफिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार के दीमक से खोखले हो चुके परिवहन महकमे और आम नागरिकों की असमय मौतों के खिलाफ फूटा यह जनआक्रोश अब एक विकराल सियासी तूफान का रूप ले चुका है, जिससे पूरी सरकार बैकफुट पर आ गई है।
सड़कों पर दौड़ता काल और लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों से दहला जनमानस
इस जनआक्रोश की सबसे बड़ी और मुख्य वजह देश की सड़कों पर लगातार बढ़ती हुई भीषण सड़क दुर्घटनाएं और उसमें गंवाई जा रही बेकसूर लोगों की जानें हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान देश के विभिन्न एक्सप्रेसवे, हाईवे और शहरी इलाकों में तेज रफ्तार वाहनों, ओवरलोडिंग, अनफिट कमर्शियल गाड़ियों और ट्रैफिक नियमों के खुलेआम उल्लंघन के कारण सड़क हादसों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। रोजाना सुबह अखबारों के पन्नों और टीवी चैनलों पर हंसते-खेलते परिवारों के उजड़ने की दर्दनाक खबरें आम हो चुकी हैं। जनता का सीधा और तीखा आरोप है कि परिवहन विभाग और मोटर व्हीकल अथॉरिटी की मिलीभगत और घोर लापरवाही के कारण सड़कों पर मौत का यह तांडव बेरोकटोक जारी है। मंत्री और अधिकारी एयरकंडीशन कमरों में बैठकर केवल खोखले आंकड़े पेश कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर जनता रोज सड़कों पर अपनी जान गंवाने को मजबूर है।
लाइसेंस बनवाने से लेकर फिटनेस तक, परिवहन विभाग में फैला भ्रष्टाचार बना नासूर
परिवहन मंत्री के खिलाफ गुस्से की आग सुलगने के पीछे दूसरा सबसे बड़ा कारण मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट और आरटीओ (RTO) कार्यालयों में दीमक की तरह फैला हुआ भ्रष्टाचार है। प्रदर्शनकारियों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों का आरोप है कि रिश्वतखोरी के दम पर बिना किसी गाड़ी की सही जांच किए फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं, और पैसों के बल पर बिना ठीक से ड्राइविंग सीखे लोगों को धड़ल्ले से ड्राइविंग लाइसेंस बांटे जा रहे हैं। जब तक ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी की फिटनेस सिर्फ पैसों के लेन-देन पर तय होती रहेगी, तब तक सड़कों पर अनाड़ी और लापरवाह ड्राइवर मौत बनकर दौड़ते रहेंगे। जनता का कहना है कि ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर इस सिस्टम को सुधारने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं, और उनकी नाक के नीचे चल रहे इस भ्रष्टाचार के रैकेट ने अनगिनत घरों के चिराग बुझा दिए हैं।
‘मौत के मंत्री इस्तीफा दो’ के नारों से गूंजे शहर, विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
राजधानी की मुख्य सड़कों, चौराहों और सरकारी परिवहन कार्यालयों के बाहर उग्र प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों, आम नागरिकों और पीड़ित परिवारों ने ‘मौत के मंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगाकर पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक परिवहन मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते और सड़क सुरक्षा को लेकर कोई ठोस तथा कड़े नियम लागू नहीं किए जाते, तब तक उनका यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। इस जनआक्रोश को भुनाने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी सांसदों और विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर हमला बोला है और कहा है कि यह सरकार जनता की जान बचाने में पूरी तरह विफल रही है, इसलिए परिवहन मंत्री को एक मिनट भी अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
सरकार और परिवहन मंत्री का बचाव पक्ष: क्या कहते हैं नीति निर्माता?
दूसरी ओर, जनता के इस भारी विरोध और इस्तीफे की मांग के बीच परिवहन मंत्री और सरकारी प्रवक्ताओं ने सफाई पेश करते हुए कहा है कि सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और एक्सीडेंट्स को रोकने के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय का दावा है कि स्मार्ट ट्रैफिक कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है, ओवरस्पीडिंग पर स्वचालित चालान काटे जा रहे हैं और हाईवे पर पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है। हालांकि, सरकार की इन दलीलों और कागजी दावों को जनता और विशेषज्ञों ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। जानकारों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर करप्शन को खत्म कर सख्त और पारदर्शी कानून लागू नहीं किए जाते, तब तक केवल विज्ञापनों से हादसों को नहीं रोका जा सकता।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है आंदोलन, क्या झुकेगी सरकार?
इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और सामाजिक संकट ने देश की सत्ताधारी पार्टी के माथे पर गहरी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यदि आने वाले दिनों में स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है, जिससे सरकार की साख को भारी नुकसान पहुंच सकता है। जनता की आंखें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री या शीर्ष नेतृत्व इस बढ़ते दबाव के आगे झुकते हुए विवादित परिवहन मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करते हैं या फिर कोई बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर जनता के गुस्से को शांत करने की कोशिश करते हैं। फिलहाल, सड़कों पर सुलगती यह आग और ‘मौत के मंत्री इस्तीफा दो’ का नारा पूरे देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।