चीन को बड़ा झटका; नेपाल के नए प्रधानमंत्री का पहला भारत दौरा तय, होने जा रहा है सबसे बड़ा समझौता
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के आगामी भारत दौरे को लेकर कूटनीतिक गलियारों में तैयारियां तेज हो गई हैं। 23 से 25 नवंबर के बीच प्रस्तावित इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र और दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार को मुख्य एजेंडे के तौर पर आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है। नेपाल के ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्रालय ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए प्राथमिकताओं की सूची बनानी शुरू कर दी है, ताकि दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को नए आयाम तक पहुंचाया जा सके।
नेपाल के ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री के दौरे में ऊर्जा परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सचिव स्तर के तंत्र के माध्यम से कई मुद्दों पर पहले से काम जारी है और अब ऊर्जा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच आपसी समन्वय बनाकर अंतिम एजेंडे पर मुहर लगाई जा रही है। हालांकि आधिकारिक तारीखों का औपचारिक ऐलान अभी बाकी है, लेकिन आंतरिक सहमति के आधार पर ऊर्जा मंत्रालय ने अपनी पूरी तैयारी झोंक दी है।
इस दौरे का सबसे अहम केंद्र बिंदु पोखरा में आयोजित नेपाल-भारत ऊर्जा सचिव स्तरीय संयुक्त संचालन समिति की बैठक में बनी सहमति को धरातल पर उतारना है। उस बैठक में नेपाल से भारत को 1,650 मेगावाट बिजली निर्यात करने पर सहमति बनी थी, जिसे अब अंतिम रूप दिए जाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 750 मेगावाट की पश्चिम सेती और 450 मेगावाट क्षमता वाली सेती नदी-6 जलविद्युत परियोजनाएं भी द्विपक्षीय बातचीत की मेज पर मुख्य आकर्षण रहेंगी। इन दोनों ही विशाल परियोजनाओं में भारत सरकार के स्वामित्व वाली प्रमुख जलविद्युत कंपनी एनएचपीसी (NHPC) सीधे तौर पर जुड़ी हुई है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा और आर्थिक रिश्ते और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।