ब्राज़ील की राजनीति में भूचाल: पासपोर्ट सरेंडर का था सख्त आदेश, फिर भी परिवार समेत कैसे अमेरिका भाग निकले बोल्सोनारो?
ब्राज़ील की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। हालिया राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद विपक्षी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो अमेरिका पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने पहले ही उन्हें और उनके परिवार को वीज़ा दे दिया था। पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो पर ब्राज़ील में भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी जैसे गंभीर मामलों में जांच चल रही है और उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का सख्त आदेश भी दिया गया था।
इस बीच, ब्राज़ील के चुनाव नतीजों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा की ऐतिहासिक जीत पर सवाल उठाते हुए इसे 'धांधली' करार दिया है। ट्रंप ने चुनाव प्रक्रिया पर संदेह जताते हुए कहा, "मैंने किसी का पक्ष नहीं लिया, लेकिन ईमानदारी से कहूं तो यह एक और धांधली वाला चुनाव लग रहा था। चुनाव के तरीके पर कोई सवाल नहीं होना चाहिए, लेकिन जो मैंने देखा वह बहुत भ्रष्ट और भयानक था।" हालांकि, ट्रंप का फ्लावियो बोल्सोनारो को परदे के पीछे से समर्थन हासिल होने की बातें भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही हैं।
80 वर्षीय लूला डा सिल्वा, जो कभी फैक्ट्री में काम करते थे और अब लेफ्ट-विंग पार्टी 'पार्टिडो डॉस ट्राबलहाडोर्स' (PT) के कद्दावर नेता हैं, ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लूला की इस जीत ने दक्षिण अमेरिका में उठ रही राइट-विंग लहर पर ब्रेक लगा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप और लूला हमेशा एक-दूसरे के मुखर आलोचक रहे हैं, फिर भी ट्रंप ने सोमवार को चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि उनकी लूला के साथ 'बहुत अच्छी' बनती है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्हें लूला पसंद हैं, लेकिन चुनाव में एक्सटेंशन दिए जाने जैसे तरीके उन्हें अजीब और खराब लगे।
ब्राज़ील के आधिकारिक चुनावी आंकड़ों के अनुसार, इस बेहद करीबी और कांटे की टक्कर में लूला डा सिल्वा ने 51.75 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि राइट-विंग नेता फ्लावियो बोल्सोनारो 48.25 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। अपनी इस शानदार और ऐतिहासिक चौथी जीत के बाद लूला ने ब्राज़ील की जनता का आभार व्यक्त किया है।