ईरान के किस पहाड़ से कांप रहा अमेरिका? ट्रंप की नजर पिकएक्स माउंटेन पर, आखिर अंदर छिपा क्या है?
मध्य पूर्व (Middle East) के भयंकर तनाव और वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक ऐसा नाम सामने आया है जिसने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नींद उड़ा दी है। ईरान के मध्य भाग में स्थित एक बंजर और बेहद पथरीला पहाड़ जिसे 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) के नाम से जाना जाता है, इस समय वैश्विक खुफिया एजेंसियों और अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन का सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। उपग्रह से ली गई नवीनतम तस्वीरों (Satellite Imagery) और खुफिया रिपोर्ट्स ने यह साफ कर दिया है कि ईरान इस विशालकाय पहाड़ के सैकड़ों फीट अंदर एक ऐसा अभेद्य और अति-सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाना (Underground Nuclear Facility) तैयार कर रहा है जिसे दुनिया का सबसे खतरनाक से खतरनाक बम भी नष्ट नहीं कर सकता। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को डर है कि इस अभेद्य पहाड़ की आड़ में ईरान बहुत जल्द अपना पहला परमाणु बम तैयार करने की अंतिम सीमा लांघ सकता है, और यही वजह है कि अमेरिका इस पहाड़ की एक-एक हलचल पर टकटकी लगाए बैठा है।
पिकएक्स माउंटेन कोई साधारण पर्वत नहीं है, बल्कि यह ईरान के प्रसिद्ध नतांज (Natanz) परमाणु परिसर के ठीक पास स्थित एक प्राकृतिक विशाल चट्टानी ढाल है। अमेरिका और इजराइल ने अतीत में ईरान के कई सतह पर बने परमाणु प्रतिष्ठानों को साइबर हमलों, ड्रोन स्ट्राइक्स और वैज्ञानिक हत्याओं के जरिए पंगु बनाने की कोशिश की थी। इन्हीं हमलों से सबक लेते हुए ईरान ने अपनी परमाणु तकनीकों, सेंट्रीफ्यूज और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से जमीन के सैकड़ों मीटर नीचे यानी इस पहाड़ के पेट में स्थानांतरित कर दिया है। इस मास्टरस्ट्रोक ने पश्चिमी देशों की रातों की नींद हराम कर दी है क्योंकि इस पहाड़ को भेद पाना मौजूदा पारंपरिक हथियारों के लिए लगभग असंभव माना जा रहा है।
पहाड़ के सीने को चीरकर बनाई गई सुरंगे: जानिए पिकएक्स माउंटेन के अंदर का पूरा सच
वैश्विक सामरिक विश्लेषकों और उपग्रह तस्वीरों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, पिकएक्स माउंटेन के अंदर ईरान का निर्माण कार्य पिछले कुछ वर्षों से अभूतपूर्व गति से चल रहा है। पहाड़ के चारों दिशाओं से ढलानों को काटकर चार बड़ी प्रवेश सुरंगे (Tunnels) बनाई गई हैं जो सीधे पहाड़ के केंद्र में बनी विशाल प्रयोगशालाओं और संवर्धन कक्षों तक जाती हैं। यह ठिकाना जमीन से लगभग 80 से 100 मीटर (260 से 300 फीट) से भी अधिक गहराई में स्थित है। इसके ऊपर ग्रेनाइट की ठोस और प्राकृतिक चट्टानों की इतनी मोटी परत है कि कोई भी बंकर बस्टर बम इसे नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
पहाड़ के भीतर केवल परमाणु लैब ही नहीं, बल्कि हजारों की संख्या में अत्याधुनिक सेंट्रीफ्यूजों का एक विशाल नेटवर्क स्थापित किया गया है। इन सुरंगों का ढांचा इतना विशाल है कि इनके भीतर भारी मालवाहक वाहन, कंक्रीट मिक्सर ट्रक और विशेष लॉजिस्टिक गाड़ियां आसानी से आ-जा सकती हैं। इतना ही नहीं, पहाड़ के भीतर स्वयं के बिजली संयंत्र, वेंटिलेशन सिस्टम, जल शोधन प्रणाली और आपातकालीन आपूर्ति के लिए विशाल भंडारण कक्ष बनाए गए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि बाहर कोई भीषण युद्ध या हवाई हमला होता भी है, तब भी पहाड़ के अंदर मौजूद ईरानी वैज्ञानिक महीनों तक बिना किसी रुकावट के अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रख सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्यों बना सबसे बड़ा दुःस्वप्न?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में हमेशा से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया है। लेकिन पिकएक्स माउंटेन के अंदर जारी निर्माण कार्य ने अमेरिकी सैन्य रणनीतिकारों को एक बहुत बड़े धर्मसंकट में डाल दिया है। अमेरिकी सेना के पास मौजूद सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर बम 'GBU-57 Massive Ordnance Penetrator' (MOP) भी अधिकतम 60 मीटर (200 फीट) तक ही कंक्रीट और जमीन को भेदने में सक्षम है। ऐसे में 100 मीटर गहराई में ठोस ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे बने इस ईरानी ठिकाने को हवाई हमले से पूरी तरह तबाह करना अमेरिका के लिए तकनीकी रूप से नामुमकिन जैसा हो गया है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान इस पहाड़ की गहराई में 60 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत (वेपन-ग्रेड) तक यूरेनियम संवर्धित कर रहा है। 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल सीधे तौर पर परमाणु हथियार या एटम बम बनाने में किया जाता है। अमेरिका और इजराइल को इस बात का सबसे बड़ा डर है कि यदि ईरान ने पिकएक्स माउंटेन के भीतर आवश्यक मात्रा में वेपन-ग्रेड यूरेनियम तैयार कर लिया, तो वह महज कुछ ही हफ्तों या दिनों के भीतर परमाणु बम का निर्माण कर लेगा और दुनिया के पास उसे रोकने का कोई भी कूटनीतिक या सैन्य रास्ता नहीं बचेगा। यही डर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को कोई भी बड़ा या आक्रामक कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहा है।
इजराइल की बेचैनी और मध्य पूर्व में परमाणु महायुद्ध की आहट
पिकएक्स माउंटेन के इस रहस्यमयी प्रोजेक्ट से केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि उसका सबसे करीबी सहयोगी देश इजराइल भी बुरी तरह से बौखलाया हुआ है। इजराइल इसे अपने अस्तित्व के लिए सीधा और तात्कालिक खतरा मानता है। इजराइली सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जब पिकएक्स माउंटेन का यह भूमिगत परिसर पूरी तरह से क्रियाशील और सुरक्षित हो जाएगा, तो ईरान पर किसी भी प्रकार का निवारक हमला (Preventive Strike) बेअसर साबित होगा। इसी वजह से इजराइल लगातार अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि इस ठिकाने के पूरी तरह से चालू होने से पहले ही कोई संयुक्त सैन्य कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और असैन्य उद्देश्यों के लिए है, लेकिन साथ ही उसने यह चेतावनी भी दी है कि यदि उसके किसी भी ठिकाने पर हमला करने की हिमाकत की गई, तो वह पूरे मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और इजराइल को राख में मिला देगा। पिकएक्स माउंटेन के चारों तरफ ईरान ने अपने सबसे आधुनिक 'S-300' और स्वदेशी 'बावर-373' मिसाइल रक्षा प्रणालियों को तैनात कर रखा है जो किसी भी हवाई हमले को हवा में ही नाकाम करने की क्षमता रखते हैं।
निष्कर्ष: वैश्विक राजनीति का नया केंद्र और आने वाले समय की बड़ी चेतावनी
पिकएक्स माउंटेन अब महज एक भौगोलिक पहाड़ नहीं रह गया है, बल्कि यह 21वीं सदी की भू-राजनीति और परमाणु होड़ का सबसे बड़ा और खतरनाक प्रतीक बन चुका है। अमेरिका, ट्रंप प्रशासन और इजराइल की तमाम चेतावनियों और पाबंदियों के बावजूद ईरान का इस पहाड़ के सीने में अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को सुरक्षित कर लेना इस बात का प्रमाण है कि शक्ति संतुलन अब बदल रहा है। यदि आने वाले दिनों में कूटनीति के रास्ते बंद होते हैं, तो इस एक पहाड़ के अंदर छिपा राज पूरे मध्य पूर्व को एक ऐसे भीषण युद्ध में धकेल सकता है जिसकी लपटें संपूर्ण दुनिया को अपनी चपेट में ले लेंगी। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें पिकएक्स माउंटेन की उस अंधेरी और रहस्यमयी गहराई पर टिकी हुई हैं, जहां से मानव इतिहास के एक नए और खतरनाक अध्याय की इबारत लिखी जा रही है।