अमेरिका में नवंबर के पहले मंगलवार को ही क्यों डाले जाते हैं वोट? इसके पीछे चर्च की मजबूरी वाला फैक्टर क्या
दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र कहे जाने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में राष्ट्रपति चुनाव से लेकर अन्य आम चुनावों के आयोजन की एक ऐसी अनोखी परंपरा है जो करीब 180 से भी अधिक सालों से लगातार चली आ रही है। अमेरिका में मतदान हमेशा नवंबर महीने के 'पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार' (First Tuesday after the first Monday in November) को ही होता है। कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका जैसे विकसित देश में सप्ताह के बीच यानी मंगलवार (Tuesday) को ही मतदान कराने का सख्त कानून क्यों बनाया गया? क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक मजबूरी थी, या फिर इसमें चर्च की धार्मिक मान्यताओं, ईसाई कैलेंडर और 19वीं सदी के कृषि प्रधान समाज का कोई गहरा संबंध छिपा हुआ था? इस दिलचस्प चुनावी नियम का इतिहास 1845 के कानून, दूर-दराज के खेतों, घोड़े-गाड़ियों के सफर और चर्च से जुड़े नियमों पर आधारित है।
1845 का वह ऐतिहासिक कानून जिसने तय की मतदान की तारीख
अमेरिका के शुरुआती दौर में चुनाव की कोई एक निश्चित तारीख तय नहीं होती थी। 1800 के शुरुआती दशकों तक हर अमेरिकी राज्य अपनी सुविधानुसार अलग-अलग दिनों और हफ्तों में वोटिंग करवाता था। राज्यों को अपने प्रतिनिधि (Electors) चुनने के लिए 34 दिनों की लंबी विंडो दी जाती थी। इस वजह से शुरुआती रुझानों की खबरें दूसरे राज्यों के मतदाताओं को प्रभावित करने लगती थीं और धांधली के आरोप लगने लगे थे।
इस अव्यवस्था को खत्म करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस ने वर्ष 1845 में एक एकीकृत राष्ट्रीय मतदान कानून (Uniform Election Day Act) पास किया। इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि पूरे देश में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान एक ही दिन कराया जाएगा। लेकिन दिन तय करते समय उस दौर के सामाजिक, धार्मिक और भौगोलिक ताने-बाने को ध्यान में रखना पड़ा, जिसने मंगलवार के दिन पर मुहर लगाई।
चर्च और रविवार की पूजा का 'मजबूरी वाला फैक्टर'
19वीं सदी के अमेरिका में ईसाई धर्म और चर्च की परंपराओं का लोगों के दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव था। अधिकांश अमेरिकी जनता रविवार के दिन चर्च जाती थी, जिसे 'Sabbath' यानी ईश्वर की आराधना और विश्राम का दिन माना जाता था। उस दौर में मतदान केंद्र शहरों या काउंटी मुख्यालयों में होते थे। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों को पोलिंग बूथ तक पहुंचने के लिए घोड़े-गाड़ी या पैदल पूरा एक दिन का समय लगता था।
अगर चुनाव सोमवार (Monday) को रखा जाता, तो लोगों को वोट डालने के लिए रविवार को ही अपने घरों से निकलना पड़ता। ऐसा करने पर उनकी रविवार की चर्च प्रार्थना छूट जाती, जो धार्मिक रूप से वर्जित और अनुचित माना जाता था। चर्च की इस मजबूरी के कारण सोमवार को यात्रा का दिन तय किया गया ताकि लोग रविवार को पूरी निष्ठा से चर्च में प्रार्थना कर सकें और सोमवार को यात्रा शुरू करके मंगलवार को पोलिंग बूथ पहुंचकर वोट डाल सकें।
बुधवार के 'बाजार दिवस' और हफ्ते के अन्य दिनों का गणित
अमेरिकी सांसदों ने केवल रविवार और सोमवार ही नहीं, बल्कि सप्ताह के बाकी दिनों का भी बारीकी से अध्ययन किया था। उस दौर के किसान हर हफ्ते बुधवार को शहर के बाजारों में अपनी फसल, दूध और अनाज बेचने के लिए जाया करते थे, जिसे 'Market Day' कहा जाता था। अगर बुधवार को मतदान रखा जाता, तो उनका व्यापार ठप्प हो जाता।
वहीं शुक्रवार और शनिवार को सप्ताह के अंतिम कार्यदिवस होने और धार्मिक तैयारियों के कारण खारिज कर दिया गया। इस प्रकार रविवार (चर्च का दिन), सोमवार (सफर का दिन) और बुधवार (बाजार का दिन) के बीच मंगलवार ही इकलौता ऐसा दिन बचा जो किसानों के धार्मिक संस्कारों, कृषि कार्यों और यात्रा व्यवस्था में पूरी तरह फिट बैठता था।
'पहले सोमवार के बाद वाला मंगलवार' ही क्यों? 1 नवंबर से बचने का गणित
अमेरिकी कानून में सिर्फ "पहला मंगलवार" नहीं लिखा गया है, बल्कि लिखा गया है— "नवंबर के पहले सोमवार के बाद का मंगलवार"। इसके पीछे भी एक बेहद चतुर व्यावसायिक और धार्मिक कारण था। यदि 1 नवंबर को मंगलवार पड़ता, तो उस दिन चुनाव कराने से बचा जा सके। इसके पीछे दो मुख्य वजहें थीं:
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ऑल सेंट्स डे (All Saints' Day): रोमन कैथोलिक और कई ईसाई संप्रदायों में 1 नवंबर को 'ऑल सेंट्स डे' का पवित्र त्यौहार मनाया जाता है, जिस दिन श्रद्धालुओं को मास (Mass) में भाग लेना अनिवार्य होता है।
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व्यापारियों का बहीखाता (Accounting Day): 19वीं सदी के व्यापारी महीने की पहली तारीख को पिछले महीने के हिसाब-किताब और बहीखाते (Balance Sheets) को अंतिम रूप देते थे। इसलिए 1 नवंबर को वोटिंग होने से व्यापारियों का कामकाज प्रभावित होता। इसी वजह से कानून निर्माताओं ने तय किया कि मतदान हमेशा 2 नवंबर से 8 नवंबर के बीच वाले मंगलवार को ही होगा।
नवंबर महीने का ही चुनाव के लिए क्यों किया गया चयन?
दिन के अलावा महीना चुनने के पीछे भी अमेरिका का कृषि-आधारित समाज ही सबसे बड़ा कारण था। 1800 के दशक में अमेरिका की 70% से अधिक आबादी खेती-किसानी करती थी। वसंत और गर्मियों का समय खेतों की जुताई और बुआई में बीतता था, इसलिए उस समय किसान खेती छोड़कर वोट डालने नहीं आ सकते थे।
शुरुआती शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) में फसलों की कटाई (Harvesting) का काम अपने चरम पर होता था। वहीं, दिसंबर और जनवरी में भीषण बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण सड़कों पर घोड़े-गाड़ियों से यात्रा करना लगभग असंभव हो जाता था। नवंबर का महीना एक ऐसा समय था जब फसलों की कटाई पूरी हो चुकी होती थी, मौसम यात्रा के अनुकूल रहता था और सर्दियों की कनकनी शुरू नहीं हुई होती थी। इसीलिए नवंबर को मतदान के लिए सबसे आदर्श महीना माना गया।
आधुनिक दौर में 180 साल पुरानी परंपरा पर उठते सवाल
आज का आधुनिक अमेरिका 19वीं सदी के कृषि समाज से पूरी तरह बदल चुका है। आज ज्यादातर लोग शहरों में रहते हैं, नौकरियां करते हैं और मंगलवार को वर्किंग डे होने के कारण कई लोगों को वोट डालने के लिए ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ती है या लंबी कतारों में लगना पड़ता है। ब्रिटेन या भारत जैसे देशों में जहां सप्ताहांत (Weekends) या राष्ट्रीय अवकाश पर मतदान होता है, वहीं अमेरिका आज भी अपने 1845 के पुराने कानून पर टिका हुआ है।
हालांकि, इस ऐतिहासिक असुविधा को दूर करने के लिए कई अमेरिकी राज्यों ने अब 'अर्ली वोटिंग' (Early Voting) और 'मेल-इन बैलेट' (डाक द्वारा मतदान) की सुविधा दे दी है, लेकिन आधिकारिक "इलेक्शन डे" की मुहर आज भी उसी नवंबर के पहले मंगलवार पर ही लगती है, जिसकी शुरुआत कभी किसानों और चर्च की सुविधा को ध्यान में रखकर की गई थी।