Up kiran,Digital Desk : दिल्ली वालों के लिए सुबह उठकर खिड़की से बाहर छाई धुंध की मोटी चादर देखना अब आम बात हो गई है। ऐसा महसूस होता है जैसे हम किसी गैस चैंबर में रह रहे हों। हालांकि, अच्छी खबर ये है कि लगातार 24 दिनों तक बेहद ज़हरीली हवा में सांस लेने के बाद, रविवार को दिल्ली को थोड़ी सी राहत मिली है।
रविवार की सुबह हवा की क्वालिटी थोड़ी सुधरी और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 से नीचे आ गया, जो पिछले कई हफ्तों में पहली बार हुआ है। दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी हवा की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई।
पर इसका मतलब यह नहीं कि सब ठीक हो गया
यह राहत बस थोड़ी सी है। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ जैसी जगहों पर भी हवा 'खराब' श्रेणी में है, और आनंद विहार-आईटीओ जैसे इलाकों का तो हाल और भी बुरा है, जहाँ हवा 'बहुत खराब' बनी हुई है। आसान भाषा में कहें तो यहां सांस लेना अब भी मुश्किल है और आँखों में जलन महसूस हो सकती है।
हमारी हवा को ज़हरीला बना कौन रहा है?
- गाड़ियों का धुआं: सड़कों पर दौड़ती लाखों गाड़ियां प्रदूषण फैलाने में सबसे आगे हैं। कुल प्रदूषण का लगभग 19% हिस्सा इन्हीं का है।
- पराली का धुआं: भले ही अभी पराली जलाने का असर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन यह भी एक बड़ी वजह है।
- फैक्ट्रियों और कंस्ट्रक्शन की धूल: शहर के आसपास की फैक्ट्रियों और हर तरफ चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी हवा को खराब कर रही है।
- हमारे घरों का कचरा: आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे घरों से निकलने वाला कचरा भी हवा को गंदा करने में छोटा-मोटा रोल निभाता है।
आगे क्या होगा?
मौसम विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि यह राहत ज़्यादा दिन टिकने वाली नहीं है। सोमवार से हवा फिर से 'बेहद खराब' कैटेगरी में जा सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में सांस के मरीज़ों, बुज़ुर्गों और बच्चों को अपना खास ख्याल रखना होगा। जब तक हवा पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक बाहर निकलते समय मास्क लगाना और बेवजह घर से न निकलना ही समझदारी है।

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