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Up Kiran, Digital Desk: मध्य पूर्व में हिंसा और तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इज़राइल ने एक बार फिर यमन की राजधानी सना में हवाई हमला किया है, जिसमें एक बड़ी खबर सामने आई है - ईरान समर्थित हूती सरकार के कथित प्रधानमंत्री अहमद अल-रहवी के मारे जाने की ख़बर है। इस हमले ने पूरे क्षेत्र में भूचाल ला दिया है और एक बड़े टकराव की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

कौन थे अहमद अल-रहवी और क्यों थे वो इज़राइल के निशाने पर

अहमद अल-रहवी हूती विद्रोहियों के एक महत्वपूर्ण नेता थे। हूतियों ने जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को उखाड़ फेंका और सना पर कब्ज़ा किया, तो उन्होंने अपनी समानांतर सरकार बनाई, और रहवी को उसका प्रधानमंत्री बनाया गया। दुनिया के अधिकांश देश उनकी सरकार को मान्यता नहीं देते थे, लेकिन हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में उनका प्रभाव बहुत ज़्यादा था। उन्हें ईरान का एक कट्टर समर्थक और इज़राइल के खिलाफ़ हूती ऑपरेशनों का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था।

इज़राइल और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से तनाव है, जो हाल ही में लाल सागर में जहाजों पर हूतियों के हमलों के कारण और बढ़ गया था। हूतियों का दावा था कि वे गाज़ा में फिलिस्तीनियों पर इज़राइली हमलों के जवाब में इज़राइल से जुड़े या इज़राइल जा रहे जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इज़राइल का मानना है कि अल-रहवी इन हमलों को निर्देशित कर रहे थे।

हमले का प्रभाव और भविष्य की चुनौतियाँमध्य पूर्व में नया संकट: किसी भी देश के प्रधानमंत्री स्तर के व्यक्ति का मारा जाना कोई सामान्य घटना नहीं है। यह घटना इज़राइल और ईरान के बीच परोक्ष युद्ध (proxy war) को और तेज़ कर सकती है।

हूतियों का जवाबी हमला: आशंका है कि हूती विद्रोही इस हमले का कड़ा जवाब दे सकते हैं। लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले और बढ़ सकते हैं, या फिर इज़राइल पर मिसाइल दागने की कोशिश की जा सकती है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता: इस घटना से पूरे क्षेत्र में स्थिरता और भी बिगड़ सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की आपूर्ति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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