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Up kiran,Digital Desk : क्या आपके मोबाइल का डेली 1.5GB या 2GB डेटा दिन खत्म होते ही 'जीरो' हो जाता है? क्या आपको लगता है कि जिस डेटा के लिए आपने पैसे चुकाए हैं, वह इस्तेमाल न होने पर बेकार नहीं जाना चाहिए? इसी आम आदमी की समस्या को आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद के उच्च सदन में पुरजोर तरीके से उठाया है। चड्ढा ने मांग की है कि टेलीकॉम कंपनियों के मौजूदा नियमों में बदलाव कर 'डेटा रोलओवर' की सुविधा अनिवार्य की जानी चाहिए।

शून्य काल में गूंजा डेटा का मुद्दा: "बचा हुआ डेटा कैरी-फॉरवर्ड हो"

मंगलवार को राज्यसभा में शून्य काल (Zero Hour) के दौरान राघव चड्ढा ने मोबाइल ग्राहकों के हितों की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में टेलीकॉम कंपनियां जो प्लान देती हैं, उनमें डेटा की एक दैनिक सीमा (Daily Limit) होती है। यदि कोई ग्राहक दिन भर में अपना पूरा कोटा इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो रात 12 बजते ही वह डेटा खत्म हो जाता है। चड्ढा ने सुझाव दिया कि दिन के अंत में बचा हुआ डेटा अगले दिन की लिमिट में जोड़ा जाना चाहिए, ताकि ग्राहकों को उनके द्वारा भुगतान किए गए हर KB का पूरा लाभ मिल सके।

क्या है 'डेटा बैंक' और 'वैल्यू एडजस्टमेंट' का सुझाव?

सांसद चड्ढा ने केवल अगले दिन डेटा जोड़ने की ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने एक दूरगामी मॉडल पेश किया। उन्होंने कहा कि:

डेटा बैंक: यदि कोई ग्राहक लंबे समय तक डेटा का कम इस्तेमाल करता है, तो उसका अनयूज्ड डेटा एक 'डेटा बैंक' में जमा होना चाहिए।

अगले रिचार्ज में छूट: चड्ढा ने यह भी सुझाव दिया कि अगर डेटा इस्तेमाल नहीं हो पाया है, तो अगले रिचार्ज के समय उस बचे हुए डेटा की कीमत (Value) को कुल बिल में से घटाया जाना चाहिए। यह सीधे तौर पर ग्राहकों की जेब को राहत देने वाला कदम होगा।

विदेशी मॉडल का दिया हवाला: अमेरिका और ब्रिटेन में पहले से है सुविधा

अपनी मांग के पक्ष में राघव चड्ढा ने वैश्विक उदाहरण भी पेश किए। उन्होंने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में एटीएंडटी (AT&T) और स्काई मोबाइल जैसी दिग्गज कंपनियां 'डेटा रोलओवर' की सुविधा पहले से दे रही हैं। वहां ग्राहकों का बचा हुआ डेटा अगले महीने के साइकिल में जुड़ जाता है। चड्ढा का सवाल था कि अगर विदेशों में यह संभव है, तो भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार में ग्राहकों के साथ यह भेदभाव क्यों हो रहा है?

टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर लगाम की जरूरत

फिलहाल भारत में अधिकांश कंपनियां प्री-पेड प्लान्स में डेटा कैरी-फॉरवर्ड की सुविधा नहीं देती हैं, जबकि पोस्ट-पेड के कुछ चुनिंदा प्लान्स में यह उपलब्ध है। राघव चड्ढा की इस मांग ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या ट्राई (TRAI) को इस मामले में हस्तक्षेप कर आम जनता को राहत देनी चाहिए।