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scientific mystery: मुस्लिम धर्म में फिरौन को एक ऐसा व्यक्ति है जिसे हर मुसलमान घृणा की नजर से देखता है। इसकी मृत्यु के बाद भी इसकी लाश एक बक्से में रखी है। दावा किया जाता है कि इसकी लाश आज तक खराब नहीं हुई। क्योंकि ईश्वर ने ऐसा आदेश दिया है कि फिरौन को जजमेंट डे तक ऐसा ही रखेंगे ताकि आने वाले लोग इससे इबरत हासिल कर सकें।

धार्मिक जानकारी के अनुसार, फिरौन की लाश का आज तक सुरक्षित रहना एक ऐतिहासिक और ईश्वर के होने अहसास दिलाता। इसे कई लोग कुरान और बाइबिल की घटनाओं से जोड़कर देखते हैं। मुस्लिम धर्म में फिरौन को सबसे बड़ा शत्रु माना जाता है। आइए जानते हैं कि ये शख्स कौन था और मुसलमान इसे इतना नापसंद क्यों करते हैं।

ऐसे हुई थी फिरौन की मौत

मिस्र के कुछ प्राचीन फिरौनों की ममियां आज भी संग्रहालयों में मौजूद हैं। ऐसा माना जाता है कि रमसेस द्वितीय या मर्नप्तह वो फिरौन हो सकता है, जिसका जिक्र हजरत मूसा की कहानी में मिलता है। जब फिरौन ने मूसा और बनी इस्राइल समुदाय का पीछा किया, तो वो अपनी सेना समेत लाल सागर में डूब गया, इससे उसकी मौत हो गई। इस्लाम के अनुसार, फिरौन की लाश को ममी के रूप में संरक्षित किया गया ताकि ये दुनिया के लिए सबक बन सके कि बुराई का अंत हमेशा बुरा होता है।

मुस्लिमों में फिरौन के प्रति नफरत की वजह

मुस्लिम फिरौन को इसलिए नफरत करते हैं क्योंकि वे उसे एक क्रूर और अभिमानी शासक मानते हैं, जिसने खुद को ईश्वर कहलवाया और हजरत मूसा व उनकी कौम पर जुल्म ढाए। उसने अल्लाह के हुक्मों की नकारा और अंततः डूबकर मारा गया। आज माना जाता है कि उसकी ममी मिस्र के काहिरा स्थित मिस्र संग्रहालय में रखी है। 

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