क्या गलत दिशा में रखा सोफा उड़ा रहा है आपकी तिजोरी का पैसा, आज ही बदलें ये 1 चीज
घर की सजावट और रोजमर्रा की जरूरत के लिए खरीदा गया फर्नीचर केवल इंटीरियर का हिस्सा नहीं है, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसका सीधा संबंध परिवार की आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति से माना गया है। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, फर्नीचर किस दिशा में रखा गया है और उसे किस तरह तैयार किया गया है, यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और धन के प्रवाह को तय करता है। अगर फर्नीचर गलत दिशा में रखा जाए, तो यह अनावश्यक खर्च और वित्तीय रुकावटों का कारण बन सकता है।
वास्तु शास्त्र के नियमों के मुताबिक, फर्नीचर को उसके वजन के आधार पर सही स्थान देना बेहद जरूरी है। हल्के वजन वाले फर्नीचर जैसे कुर्सियां, हल्के स्टूल या छोटी टेबल हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में रखनी चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक तरंगे आसानी से प्रवेश कर सकें। इसके उलट, भारी-भरकम फर्नीचर जैसे बड़े सोफा सेट, भारी अलमारी और दीवान के लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। इन दिशाओं में भारी सामान रखने से घर में स्थिरता आती है और धन का टिकाव बना रहता है। जब भी फर्नीचर के लिए लकड़ी की खरीदारी करें, तो उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को प्राथमिकता दें, क्योंकि इससे व्यापार और घर में बरकत बढ़ती है।
अगर घर या कार्यस्थल पर लकड़ी का निर्माण कार्य शुरू करवा रहे हैं, तो कारीगरों को दक्षिण या पश्चिम दिशा से काम शुरू करने और उत्तर या पूर्व दिशा में समाप्त करने की सलाह दी जाती है। ऑफिस या कार्यक्षेत्र में लकड़ी के बजाय स्टील या धातु के फर्नीचर का उपयोग अधिक लाभकारी माना गया है। इसके अलावा, फर्नीचर बनवाते समय ध्यान रखें कि उसके कोने नुकीले या धारदार न हों, बल्कि किनारों को हमेशा हल्का गोल (राउंडेड) रखना चाहिए। नुकीले किनारे दुर्घटना का जोखिम तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही वास्तु के अनुसार ये नकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं।
फर्नीचर की फिनिशिंग और डिजाइन पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है। गहरा या बहुत ज्यादा डार्क रंग नकारात्मकता को आकर्षित करता है, इसलिए हमेशा हल्के और सौम्य रंगों की पॉलिश का चुनाव करना चाहिए। यदि आप अपने फर्नीचर पर नक्काशी या कोई कलाकृति बनवा रहे हैं, तो वास्तु अनुसार सूर्य, मोर, घोड़ा, बैल, गाय, हाथी, शेर, चीता या मछली जैसी शुभ आकृतियों को उकेरना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। ये प्रतीक घर में सकारात्मकता, वैभव और सुख-शांति को बढ़ावा देते हैं।