विंडीज ने मान ली थी जीत, फिर अर्शदीप ने डेथ ओवर्स में किया ऐसा "जादू" कि पलट गया पूरा इतिहास
होल्कर स्टेडियम की छोटी बाउंड्रीज और पाटा पिच पर जहां गेंदबाजों के लिए रन रोकना सबसे मुश्किल माना जाता है, वहीं बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने अपनी धारदार गेंदबाजी से मुकाबला भारत की झोली में डाल दिया। भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक विकेट लेने वाले इस स्टार पेसर ने बल्ले से 8 गेंदों में महत्वपूर्ण 11 रन जोड़े और गेंद से 44 रन देकर 3 अहम विकेट चटकाते हुए 'प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब अपने नाम किया। पिछले मुकाबले में साधारण प्रदर्शन के दबाव के बीच मैदान पर उतरे अर्शदीप ने साबित कर दिया कि दबाव के पलों में कैसे शांत रहकर मैच विनर बना जाता है।
मुकाबले के बाद पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में जब उनसे गेंदबाजी की परिस्थितियों के बारे में पूछा गया, तो अर्शदीप ने कहा कि इंदौर की सूखी परिस्थितियों में गेंद हल्की रिवर्स हो रही थी। उन्होंने बताया कि डेथ ओवरों में जब गेंद रिवर्स होने लगती है, तो गेंदबाजी करने का मजा दोगुना हो जाता है; भले ही ओस का हल्का असर रहा हो, लेकिन पिछले मैच की नाकामी को पीछे छोड़कर टीम के लिए सही नतीजे हासिल करने का उनका इरादा पक्का था।
गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई और दबाव झेलने के सवाल पर अर्शदीप ने स्पष्ट किया कि भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में कोई सीनियर या अकेला लीडर बनने जैसी बात नहीं है, बल्कि पूरा माहौल बेहद शांत और सहयोगी है। उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के सफर में अच्छे और बुरे दिन दोनों आते हैं; जरूरी यह है कि जब किसी का दिन खराब हो, तो पूरी टीम उसका हौसला बढ़ाए और यह अहसास दिलाए कि वह टीम का अटूट हिस्सा है। अगर दिमाग शांत रहे, तो मजबूत वापसी हमेशा मुमकिन होती है।
टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के आक्रामक रुख पर नियंत्रण रखने के राज को साझा करते हुए अर्शदीप ने कहा कि जब बल्लेबाज पावरप्ले और अंतिम ओवरों में बड़े शॉट्स के लिए पूरी ताकत लगाते हैं, तो उन्हें यह चुनौती बेहद पसंद आती है। यही वह दौर होता है जहां एक गेंदबाज के कौशल, मानसिक मजबूती और रणनीतिक सूझबूझ की असली परीक्षा होती है। व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में ढलने पर उन्होंने कहा कि सफलता उसी टीम को मिलती है जो नई और पुरानी गेंद के साथ तेजी से अभ्यास कर बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाल लेती है।