सैलाब ने बहा दिए पुल और मकान, फिर भी नहीं गई एक भी जान! जानिए नेपाल में कैसे हुआ ये 'असंभव' चमत्कार!

सैलाब ने बहा दिए पुल और मकान, फिर भी नहीं गई एक भी जान! जानिए नेपाल में कैसे हुआ ये 'असंभव' चमत्कार!

नेपाल की उफनती बूढ़ी गंडक नदी में अप्रत्याशित रूप से आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई है। पानी के प्रचंड वेग में दर्जनों मकान, कई पुल और अहम बुनियादी ढांचे तिनके की तरह बह गए। हालांकि, इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच राहत की सबसे बड़ी खबर यह रही कि नदी के शुरुआती उभार के तुरंत बाद जारी किए गए हाई अलर्ट और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की मदद से तटवर्ती इलाकों के निवासियों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था। इसके चलते बाद में आई बाढ़ की दो विध्वंसकारी लहरों के बावजूद किसी भी नागरिक की जान का नुकसान नहीं हुआ और एक बड़ा मानवीय संकट टल गया।

बाढ़ के तांडव से बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंची है। आधिकारिक आकलन के अनुसार, 45 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं जबकि 27 अन्य घरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 34 कैटल शेड और 12 अन्य अस्थायी ढांचे ढह गए, कई वाहन सैलाब में बह गए और दर्जनों रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए। संपर्क मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं; बाढ़ के तेज बहाव ने दो पक्के कंक्रीट के पुल, एक बेली ब्रिज और दो अन्य संपर्क पुलों को बहा दिया है, जिससे प्रभावित बस्तियों का संपर्क मुख्य सड़क नेटवर्क से कट गया है और बचाव व राहत सामग्री पहुंचाने में गंभीर बाधाएं आ रही हैं।

इस जलप्रलय की सीधी मार ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ी है, जहां चार प्रमुख पनबिजली (हाइड्रोपावर) परियोजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। इनमें से तीन को सीधा नुकसान हुआ है। 341 मेगावाट की बूढ़ी गंडक परियोजना का मुख्य कैंप क्षेत्र तबाह हो गया है और वहां तैनात भारी निर्माण उपकरण व मशीनरी पानी में बह गई। इसके साथ ही 30.59 मेगावाट की यारू खोला परियोजना का बेली ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ है, वहीं 24.5 मेगावाट की दोभान खोला परियोजना के आवासीय कैंप व एक बेली ब्रिज के बह जाने से काम पूरी तरह ठप हो गया है। इस विनाश का सीधा असर बिजली उत्पादन और तय निर्माण समयसीमा पर पड़ना तय माना जा रहा है।

इस आपदा ने साबित कर दिया है कि पहाड़ी व संवेदनशील नदी घाटियों में सटीक निगरानी और समय पर सक्रिय होने वाली प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (अर्ली वॉर्निंग सिस्टम) कितने जीवन बचा सकती है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन बेघर हुए परिवारों के लिए भोजन, दवाइयां और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था में जुटा है, साथ ही टूटे पुलों की जगह वैकल्पिक संपर्क बहाल करने और क्षतिग्रस्त हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की मरम्मत के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।