कोहली ने संन्यास नहीं लिया, उन्हें मजबूर किया गया? वसीम जाफर के इस खुलासे से BCCI में मचा हड़कंप

कोहली ने संन्यास नहीं लिया, उन्हें मजबूर किया गया? वसीम जाफर के इस खुलासे से BCCI में मचा हड़कंप

भारतीय क्रिकेट इतिहास में विराट कोहली और रोहित शर्मा का एक हफ्ते के अंदर टेस्ट फॉर्मेट को अलविदा कहना खेल प्रेमियों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। इंग्लैंड दौरे के लिए टीम चयन से ऐन पहले लिए गए इस फैसले ने कई सवाल खड़े किए थे। रोहित के साथ-साथ विराट का संन्यास फैंस के गले इसलिए भी नहीं उतरा क्योंकि वे लाल गेंद की क्रिकेट को आगे भी जारी रखने के मूड में दिख रहे थे और तैयारी के सिलसिले में रणजी ट्रॉफी में भी उतरे थे। अब इस पूरे मामले में पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर के एक बड़े दावे ने क्रिकेट गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

वसीम जाफर ने आरोप लगाया है कि मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की अगुवाई वाली सिलेक्शन कमिटी ने कोहली के साथ सही बर्ताव नहीं किया, जिसके चलते कोहली ने गुस्से और निराशा में यह कड़ा फैसला लिया। जाफर के मुताबिक, विराट जैसे कद का खिलाड़ी जो दर्शकों को स्टेडियम तक खींच लाता है, वह आसानी से कुछ साल और टेस्ट खेल सकता था। इंग्लैंड दौरे की तैयारी में जुटे कोहली के मन में टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन का आंकड़ा छूने की प्रबल इच्छा थी, लेकिन चयन समिति के कथित उपेक्षापूर्ण रुख ने उनके इस सफर को बीच में ही रोक दिया।

आंकड़ों पर नजर डालें तो कोहली अपने करियर में 125 टेस्ट पूरे करने से महज दो मैच दूर थे, जिससे वे पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर के टेस्ट मैचों की बराबरी कर लेते। वहीं 10,000 टेस्ट रनों के ऐतिहासिक क्लब में शामिल होने के लिए उन्हें सिर्फ 770 रनों की दरकार थी। अगर वे यह मुकाम हासिल करते, तो सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के बाद इस आंकड़े तक पहुंचने वाले चौथे भारतीय बल्लेबाज बनते। हालांकि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले मैच में शतक के बाद पूरी सीरीज में महज 190 रन बनना और लगातार एक ही अंदाज में आउट होना उनके खिलाफ गया। घरेलू क्रिकेट में वापसी के बावजूद चयनकर्ताओं की बेरुखी ने उनके सुनहरे टेस्ट करियर पर अचानक पर्दा गिरा दिया।