शरद पूर्णिमा की रात चुपचाप कर लें ये 1 काम, साल भर नहीं होगी पैसों की तंगी!

शरद पूर्णिमा की रात चुपचाप कर लें ये 1 काम, साल भर नहीं होगी पैसों की तंगी!

आश्विन मास की पावन शरद पूर्णिमा, जिसे शरद पूनम, रास पूर्णिमा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा भी कहा जाता है, शरद ऋतु के शुभारंभ के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार लेकर आती है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है, जिससे उसकी किरणें औषधीय तत्वों से युक्त होकर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस पावन निशा में आकाश से अमृत तत्व बरसते हैं, इसलिए रात भर खुले आसमान के नीचे खीर रखने और अगली सुबह उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने से मानसिक शांति, आरोग्य और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।

दरिद्रता ऐसे करें दूर

बंगाल और मिथिलांचल में इसे 'कोजागरा' या 'कोजागरी लक्ष्मीन्द्र पूजा' के महापर्व के तौर पर श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। 'कोजागरी' का अर्थ है 'कौन जाग रहा है', क्योंकि इस रात माता लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि उनके स्वागत में कौन साधनारत है। जो जातक रात्रि जागरण कर मां महालक्ष्मी की उपासना करते हैं, उनके घर में दरिद्रता का नाश होकर धन-धान्य की अटूट वृद्धि होती है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह रात जीवन की तमाम बाधाओं को दूर करने और मां लक्ष्मी का स्थाई वास सुनिश्चित करने का स्वर्णिम अवसर मानी जाती है।

यदि आप अपने सुख और सौभाग्य को कई गुना बढ़ाना चाहते हैं, तो इस दिन सौभाग्य बीसा यंत्र की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा करके 'श्रीं ह्रीं श्रीं' मंत्र का यथासंभव जप करें और इसे पूजा स्थल पर स्थापित करें या गले में धारण करें। अटके हुए कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए मां लक्ष्मी के समक्ष रात भर जलने वाली अखंड ज्योति प्रज्वलित करें और स्फटिक, कमलगट्टा या रुद्राक्ष की माला से 'श्रीं ह्रीं श्रीं' मंत्र का 108 बार एकाग्रचित्त होकर जप करें। मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी के लिए लक्ष्मी पूजन के समय पांच कौड़ियों को इसी मंत्र से एक-एक कर अभिमंत्रित करके देवी चरणों में अर्पित करें और पूजा उपरांत इन्हें मंदिर में सुरक्षित रख लें।

आजीविका, मनचाही नौकरी या वेतन वृद्धि में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए गुरु यंत्र की स्थापना बेहद फलदायी मानी जाती है। देवगुरु बृहस्पति के मंत्र 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: बृहस्पतये नम:' के साथ गुरु यंत्र को सिद्ध करके पूजा घर में स्थापित करें या ताबीज रूप में धारण करें। घर में सकारात्मक ऊर्जा और मिठास घोलने के लिए देवी मां को नारियल और खोये से बनी शुद्ध मिठाई का नैवेद्य अर्पित करें। वहीं दांपत्य अथवा प्रेम संबंधों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए इस दिन विधिवत पूजा उपरांत ओपल की अंगूठी धारण करना बेहद शुभ फल प्रदान करता है।

पारिवारिक खुशहाली के लिए मां लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित कर 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र की कम से कम एक माला, 51 या 11 बार जप अवश्य करें। जीवनसाथी और बच्चों की आर्थिक प्रगति के लिए पान के पत्ते पर मखाने रखकर उनके हाथों से देवी को अर्पित करवाएं। इसके अतिरिक्त, मानसिक व्यथा से मुक्ति पाने के लिए भगवान सत्यनारायण के समक्ष घी का दीपक और चंदन की धूप जलाकर केले का भोग लगाएं। यदि कोई विशेष कार्य रुका हुआ है, तो लक्ष्मी-नारायण मंदिर में सूखे नारियल (गोले) की कटोरी और मिश्री का प्रसाद चढ़ाने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।