विपणन अधिकारी के पद से हटाने के बाद यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली पर भ्रष्टाचार के दूसरे मामलों में  कब होगी कार्रवाई, एमडी ने बताया

विपणन अधिकारी के पद से हटाने के बाद यूनियन अध्यक्ष गौरव अमोली पर भ्रष्टाचार के दूसरे मामलों में  कब होगी कार्रवाई, एमडी ने बताया

वन निगम में भ्रष्टाचार कोई नयी बात नहीं है।वन निगम उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है। भ्रष्ट तंत्र के लिए वन निगम एक ऐसी दुधारू गाय बन गया है जो निगम से लेकर शासन तक बड़े बड़े ओहदाधारियों की मनोकामना पूरी करता है। एमडी अरविन्द कुमार सिंह की काबिलियत को लेकर निगम से लेकर शासन प्रशासन हर कोई जान गया है कि एमडी साहब विशेष परिस्थितियों में कहीं भी साइन करने को तत्पर रहते हैं। वैसे एमडी साहब ड्यूटी के दौरान भी विशेष परिस्थितियों में बने रहते हैं यहाँ तक कि विशेष परिस्थितियों का आंकलन उनके मुख़ार बिंदु को देखकर सहजता से लगाया जा सकता है। एमडी साहब अपने को सुपर पावर से लैस मानते हुए खुद ही कहते हैं एमडी को बहुत पावर है इसीलिए तो साहब ने एक बाबू को विपणन अधिकारी बना दिया नियम कानून को ताक पर रखकर हालाँकि कुछ ही महीनों बाद जब एमडी साहब को होश आया या कोई बात नागँवार गुजरी तो उस बाबू को विपणन अधिकारी के पद से हटा दिया लेकिन उस बाबू के द्वारा किये गए भ्रष्टाचार को पी गए। वैसे पीने की तो साहब की पुरानी आदत है इसके लिए रात क्या और दिन क्या ! वो तो शुक्र है शासन और प्रशासन का मीटिंग की सुचना भी एक आध दिन पहले हो जाती है अगर तत्काल कोई मीटिंग कॉल हो जाये तो साहब के लिए बड़ी असहज स्थिति हो जाये ।  हमने आपको वन निगम धुरंधर पार्ट -2 में  बताया था कि कैसे वन निगम के तथाकथित अध्यक्ष गौरव (अमोली) ने विभागीय कर्मचारी होने के नाते अपना निजी भवन निर्माण के लिए निगम से रियायती दरों पर मिलने वाली इमारती लकड़ी को नियम कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए अवैध रूप से बेंच दी,जिससे वैट के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व की हानि हुई।  इसको लेकर एमडी अरविन्द कुमार सिंह ने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है सिवाय इसके कि गौरव अमोली को विपणन अधिकारी के पद हटाने के । आपको यह भी बता दें कि गौरव को निगम में  सहायक विपणन अधिकारी और डीएमओ (उप विपणन अधिकारी) के पद होते हुए भी नियमों को धता बताते हुए सीधे एमओ यानि विपणन अधिकारी बना दिया गया था जबकि विपणन अधिकारी का पद क्लास टू का है और गौरव अमोली क्लास थ्री की यूनियन के पदाधिकारी हैं। आपको बतादें कि क्लास टू के अफसरों की यूनियन ही नहीं हो सकती। हालाँकि अब गौरव अमोली से विपणन अधिकारी के पद का चार्ज वापस ले लिया गया है लेकिन भ्रष्टाचार के अन्य मामलों को लेकर एमडी अरविन्द कुमार सिंह ने फिर से चुप्पी साध ली है । 

हमने आपको पूर्व में प्रकशित खबरों में बताया था कि कैसे वन निगम के तथाकथित अध्यक्ष गौरव (अमोली) ने विभागीय कर्मचारी होने के नाते अपना निजी भवन निर्माण के लिए निगम से रियायती दरों पर मिलने वाली इमारती लकड़ी को नियम कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए बेंच दी। अब हम आपको गौरव अमोली को लेकर एक नयी खबर बताने जा रहे हैं। गौरव अमोली ने पूर्व में गाज़ियाबाद में कार्यरत और सेवा निवृत्ति के बाद भ्रष्टाचार की जाँच झेल रहे तत्कालीन डीएसम दविंदर सिंह (देवेंदर सिंह) से विपणन कार्यों से संबंधित 12 साल का अनुभव का फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किया और विपणन शाखा जोइनिंग के समय उक्त फर्जी सर्टिफिकेट का सहारा लिया, लेकिन इनके संदिग्ध आचरण को देखते हुए गौरव द्वारा लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्र की पुस्टि के लिए तत्कालीन विपणन अधिकारी द्वारा  डीएसम शिव कुमार मीणा मेरठ/ ग़ज़िआबाद को उक्त अनुभव प्रमाण पत्र की पुष्टि के लिए पत्र लिखा लेकिन ऊपरी  दबाव में आजतक उसकी पुष्टि नहीं की गयी। तत्कालीन विपणन अधिकारी द्वार फर्जी प्रमाणपत्र की जानकारी  डिजिटल चरित्र पंजिका में इसकी प्रविष्टि करके दी गयी, जिसकी पुष्टि कार्यालय के अभिलेखों से की जा सकती है। यूपी किरण की खोज बीन में ये बात सामने आयी कि गौरव अमोली द्वारा गाज़ियाबाद/मेरठ में नीलम /विक्रय से संबंधित कार्य कभी नहीं किये गए। निगम में स्वच्छ छवि रखने वाले तत्कालीन विपणन अधिकारी ने गौरव के कई मामलों को समय समय पर उठाया भी गया लेकिन उनके सेवानिवृत्ति के बाद अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गयी और मामला एक बार फिर फाइलों में दबकर रह गया। इस मामले को लेकर तत्कालीन विपणन अधिकारी सुनील जैन से संपर्क किया गया गया तो उनके द्वारा स्पष्ट जवाब न देते हुए यह कहा गया कि इस संबंध में यदि निगम का कोई सक्षम अधिकारी अथवा शासन द्वारा कोई जानकारी चाही जाएगी तो वो इसका जवाब दे देंगे। 

विभागीय जानकारों की मानें तो इस प्रकरण में जो जानकारी सामने आ रही है यदि जाँच हो जाये तो गौरव अमोली की नौकरी जा सकती है ,साथ ही उन्हें जेल की भी हवा खानी पड़ सकती है।गौरव अमोली द्वारा किये गए भ्रष्टाचार की कुंडली जिसका उल्लेख खबरों में किया गया है निगम के दस्तावेजों में उपलब्ध है।

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