भिक्षावृत्ति के नाम पर 'कमाई का धंधा'; जयपुर में मासूम बच्चों के पीछे कौन है असली मास्टरमाइंड? जांच में हड़कंप

भिक्षावृत्ति के नाम पर 'कमाई का धंधा'; जयपुर में मासूम बच्चों के पीछे कौन है असली मास्टरमाइंड? जांच में हड़कंप

राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रमुख चौराहों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने और जरूरतमंदों को सम्मानजनक जीवन से जोड़ने के लिए शुरू किया गया प्रशासनिक अभियान जमीनी स्तर पर कड़े इम्तिहान से गुजर रहा है। जयपुर जिला प्रशासन की ओर से 9 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत टीमें लगातार कार्रवाई में जुटी हैं, लेकिन शहर के व्यस्त चौराहों का नजारा पूरी तरह नहीं बदल पाया है।

रामबाग सर्किल पर जहां 12 साल की मासूम बच्ची गुलाब के फूल बेचती दिख रही है, वहीं जेडीए सर्किल और ओटीएस सर्किल पर किशोर उम्र के बच्चे पेन और टिश्यू पेपर थामे वाहनों के शीशे साफ कर पैसे जुटाते नजर आ रहे हैं। बच्चों के साथ वयस्कों की मौजूदगी यह साफ दर्शाती है कि यह समस्या केवल भिक्षावृत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि चौराहों पर बच्चों के जरिए सामान बेचने का एक व्यवस्थित तरीका बन चुका है।

एडीएम (दक्षिण) युगांतर शर्मा के अनुसार, चौराहों पर यह गतिविधियां सुबह और शाम के पीक ट्रैफिक के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय रहती हैं, इसलिए प्रशासनिक टीमें इन्हीं घंटों में केंद्रित होकर कार्रवाई कर रही हैं। अभियान के सामने सबसे बड़ी बाधा उन लोगों की मानसिकता बनी हुई है जो पुनर्वास के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं। मजबूरी में फंसे लोगों को समाज की मुख्यधारा में लौटाना आसान है, लेकिन जिन लोगों ने सड़क किनारे सामान बेचने या पैसे मांगने को आसान कमाई का जरिया बना लिया है, उन्हें समझाना सबसे पेचीदा साबित हो रहा है। प्रशासन अब इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि बच्चों के हाथों में बिकने वाले सामान के पीछे कौन सा सिंडिकेट काम कर रहा है और गुलाब, पेन या टिश्यू पेपर की सप्लाई कौन कर रहा है। हालांकि पुलिस बल की चुनाव ड्यूटी में व्यस्तता के चलते बैकवर्ड लिंकेज की जांच थोड़ी धीमी पड़ी है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस मुहिम के तहत अब तक कुल 117 लोगों को अलग-अलग चौराहों से रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 48 लोगों का विधिवत पुनर्वास कराया गया है। चौराहों की जटिल परिस्थितियों और सकारात्मक परिणामों को देखते हुए प्रशासन अब इस अभियान को 30 अक्टूबर की तय समयसीमा के बाद भी जारी रखने की तैयारी में है, ताकि गुलाबी नगरी के प्रमुख मार्गों को पूरी तरह बाल श्रम और भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया जा सके।