बांस की खेती पर बंपर सब्सिडी: 21 जिलों के किसानों को मिलेंगे 36,000, 10 डिसमिल जमीन पर भी उठाएं फायदा
बिहार के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों में कमाई के नए रास्ते खोलने के लिए राज्य सरकार ने बांस की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का फैसला किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारा जा रहा है। योजना के दायरे में बिहार के 21 चुनिंदा जिलों को शामिल किया गया है, जहां बांस की वैज्ञानिक और उन्नत खेती करने वाले अन्नदाताओं को प्रति हेक्टेयर 36,000 रुपये तक की आर्थिक मदद (सब्सिडी) सीधे दी जाएगी।
इस योजना का सबसे अहम पहलू इसका समावेशी ढांचा है, जिसे छोटे और सीमांत किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बड़े भूखंड न होने पर भी किसान महज 10 डिसमिल से लेकर 50 डिसमिल जैसी कम जोत वाली जमीन पर बांस के पौधे रोपकर योजना का पूरा लाभ ले सकते हैं। इससे परंपरागत खेती पर निर्भर रहने वाले छोटे काश्तकारों को कम लागत में एक स्थिर और दीर्घकालिक अतिरिक्त आय का जरिया मिल सकेगा।
सरकार का विजन केवल खेतों में बांस उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने का है। इसके तहत किसानों, कृषि सहायकों और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर बांस से हस्तशिल्प, फर्नीचर और सजावटी उत्पाद तैयार करने वाले कारीगरों व नए उद्यमियों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि गांवों में ही कुटीर उद्योगों और स्वरोजगार को रफ्तार मिल सके।
वर्तमान दौर में पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों और निर्माण कार्यों में बांस की मांग तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक अनाज फसलों के मुकाबले बांस की खेती में नुकसान का जोखिम काफी कम होता है और एक बार पौधा तैयार होने के बाद यह सालों तक लगातार मुनाफा देता है। ऐसे में बिहार सरकार का यह कदम राज्य के ग्रामीण अंचलों में हरित क्रांति के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोलने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।