बिहार के 8 शहरों की खुलेगी किस्मत! गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से आधा रह जाएगा सफर, जानें पूरा रूट

बिहार के 8 शहरों की खुलेगी किस्मत! गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से आधा रह जाएगा सफर, जानें पूरा रूट

यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल को हाई-स्पीड रोड नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर बिहार के लोगों में भारी उत्साह है। कुल 568 किलोमीटर लंबाई वाले इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा हिस्सा करीब 417 किलोमीटर सीधे बिहार के भूभाग से होकर गुजरेगा। हालांकि, केंद्र स्तर से परियोजना को अंतिम तकनीकी और वित्तीय मंजूरी मिलने में हो रहे विलंब के चलते जमीनी स्तर पर भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों की गति प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है।

प्रस्तावित रूट के अनुसार यह एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार के आठ प्रमुख शहरों से गुजरेगा। इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इस कॉरिडोर के तैयार होने से इन सीमावर्ती जिलों के निवासियों को सुगम, निर्बाध और तेज सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे पड़ोसी राज्यों तक आवाजाही का समय आधा रह जाएगा।

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बिहार के पथ निर्माण विभाग ने केंद्र सरकार के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है। विभाग ने आग्रह किया है कि परियोजना को केवल चार लेन तक सीमित रखने के बजाय शुरुआत से ही छह लेन (6-Lane) के रूप में विकसित किया जाए, ताकि अगले कुछ दशकों में बढ़ने वाले भारी व्यावसायिक और निजी ट्रैफिक का दबाव आसानी से संभाला जा सके। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इस संशोधित प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार है, जिसके बाद ही भूमि अधिग्रहण के मुआवजे और टेंडर आवंटन की दिशा साफ हो सकेगी।

यह एक्सप्रेसवे केवल बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और आगे चलकर पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार असम तक सड़क व्यापार का नक्शा बदल देगा। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस मार्ग के बनने से कृषि उत्पादों, भारी माल ढुलाई और स्थानीय उद्यमों को जबरदस्त गति मिलेगी। इसके साथ ही सीतामढ़ी स्थित मां जानकी जन्मस्थली मंदिर सहित मिथिलांचल व सीमांचल के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से उत्तर बिहार में पर्यटन उद्योग को भी बड़ा पंख लगेगा।