शेयर बाजार में ब्लैक मंडे: सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा लुढ़का, निफ्टी 300 अंक टूटा; भारी गिरावट के पीछे ये 4 बड़े कारण
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार की शानदार रिकवरी के बाद नए कारोबारी हफ्ते के पहले ही दिन बिकवाली का तेज दौर लौट आया। सोमवार को दोपहर के सत्र में भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 1000 अंक से अधिक टूटकर 71850 के स्तर के नीचे फिसल गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट के साथ दबाव में दिखा। बीते हफ्ते की बढ़त के बाद आई इस तेज गिरावट से दलाल स्ट्रीट के निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है।
बाजार में इस तेज गिरावट का सबसे प्रमुख कारण वैश्विक और घरेलू स्तर पर बॉन्ड यील्ड में आया भारी उछाल है। अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.3 फीसदी के पार निकलने से विदेशी निवेशक जोखिम भरे इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित बॉन्ड में लगा रहे हैं। दूसरी ओर, भारत में भी 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.37 फीसदी पर पहुंच गई, जो करीब तीन साल का उच्च स्तर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी सोखने के लिए 16 अक्टूबर से बैंकों हेतु कैश रिजर्व रेशियो (CRR) की दैनिक सीमा 90% से बढ़ाकर 99% करने के फैसले ने भी तरलता पर दबाव बढ़ा दिया है।
इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड बिकवाली ने बाजार की कमर तोड़ दी है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर के महज शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में ही 45,125 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले, जो सितंबर की कुल बिकवाली के लगभग बराबर है। इसके चलते इस साल FPI की कुल इक्विटी बिकवाली का आंकड़ा 3.60 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।
वैश्विक मोर्चे पर मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव ने भी आग में घी डालने का काम किया है। ईरान द्वारा अमेरिकी जवाब को खारिज कर क्षेत्रीय डेटा सेंटरों पर हमले की चेतावनी और रियाद एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के हमलों ने वैश्विक अनिश्चितता को चरम पर पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, आठ हफ्तों की गिरावट के बाद पिछले हफ्ते संभले बाजार में निवेशकों ने अनिश्चित माहौल को देखते हुए मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करना बेहतर समझा, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।