हाथरस की बेटी की बॉडी को दिल्ली में ही रोकना चाहते थे ये लोग!

उन्होंने कहा कि किसी दलित की बॉडी के पोस्टमार्टम के लिए उसमें दलित सदस्यों का होना अनिवार्य होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश॥ अखिल भारतीय दलित महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौहर सिंह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर खुलासा किया कि हाथरस की बेटी की मौत के दिन उन्होंने चंद्रशेखर आज़ाद से पीड़िता की बॉडी को दिल्ली में ही रोकने को कहा था। मौहर सिंह सैकड़ों लोगों के साथ देश में होने वाली रेप की घटनाओं पर रोष व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी दलित की बॉडी के पोस्टमार्टम के लिए उसमें दलित सदस्यों का होना अनिवार्य होना चाहिए।

Hathras

हाथरस की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे और चंद्रशेखर उस दिन रात 11:30 बजे तक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बाहर ही मौजूद थे। उन्होंने कहा, “मैं वहीं था, चंद्रशेखर भी थे। लड़की की तबीयत खराब हुई। एम्स में बेड नहीं मिला, दफ़दरजंग में मौत हो गयी। मैंने कहा था कि बॉडी को यहीं रोक लो, लेकिन रात के साढ़े 11 बजे पीड़िता के घरवालों से साइन कराके बॉडी को यहां से ले गये। हाथरस ले जाकर रात को ही दाह संस्कार करा दिया। क्या यही राम राज्य है? यदि यही राम राज्य है तो हमें नहीं चाहिए ऐसा राम राज्य।”

मोहर सिंह “रेप फ्री इंडिया” के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। जब उन्होंने कई वार हाथरस की बेटी को दलित बेटी कह कर संबोधित किया तो वहां कई लोगों ने इसका विरोध शुरु कर दिया। वहां लोग दो गुटों में बंट गए। लोगों ने कहा कि आप गलत बोल रहे हैं। वो हम सब की बहन थी। पूरे देश की बेटी थी। आप उसे केवल दलित की बेटी क्यों कह रहे हैं? इस पर धरना स्थल पर गहमा-गहमी हो गयी। मामला शांत करने के लिए वहां पुलिस को दखल देना पड़ा।

 

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