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Up kiran,Digital Desk : भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1989 एक मील का पत्थर साबित हुआ था, जब सूरज बड़जात्या की फिल्म 'मैंने प्यार किया' रिलीज हुई। इस फिल्म ने न केवल सलमान खान को रातों-रात सुपरस्टार बनाया, बल्कि इसके गानों ने संगीत की दुनिया में तहलका मचा दिया। 'दिल दीवाना बिन सजना के माने ना' आज भी प्यार करने वालों का पसंदीदा गाना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस कालजयी गीत को लिखने वाले गीतकार ने दशकों तक गुमनामी और गरीबी का सामना किया?

पहचान के लिए तरसते रहे असद भोपाली

इस खूबसूरत गीत को असद भोपाली ने लिखा था। असद 60 के दशक से ही बॉलीवुड में सक्रिय थे। उन्होंने 'वो जब याद आए बहुत याद आए' और 'हंसता हुआ नूरानी चेहरा' जैसे कई सुपरहिट गाने लिखे, लेकिन उन्हें वह शोहरत और पहचान कभी नहीं मिली, जो उनके समकालीन गीतकारों जैसे आनंद बक्शी या मजरूह सुल्तानपुरी को हासिल थी। वह बहुत कम पैसों में फिल्मों के लिए गीत लिखते रहे और आर्थिक तंगी में अपना गुजारा किया।

'मैंने प्यार किया' ने बदली किस्मत, पर शरीर ने नहीं दिया साथ

जब असद भोपाली ने सलमान खान और भाग्यश्री के लिए 'दिल दीवाना' लिखा, तो इस गाने ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लता मंगेशकर और एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया।

पहला बड़ा सम्मान: इस गाने के लिए असद भोपाली को फिल्मफेयर बेस्ट लिरिसिस्ट के अवॉर्ड से नवाजा गया।

त्रासदी: जिस पहचान के लिए उन्होंने दशकों तक संघर्ष किया, जब वह मिली तो उसे स्वीकार करने के लिए वह खुद मौजूद नहीं रह सके। बीमारी के कारण वह अवॉर्ड फंक्शन में शामिल नहीं हो पाए।

अवॉर्ड मिलने के 6 महीने बाद निधन

किस्मत की क्रूरता देखिए कि जिस सफलता का इंतजार असद भोपाली को पूरी उम्र था, उसका आनंद लेने के लिए उनके पास वक्त ही नहीं बचा। फिल्म की रिलीज और अवॉर्ड की घोषणा के कुछ महीनों बाद ही जून 1990 में उनका निधन हो गया। वह दुनिया को एक ऐसा गीत दे गए जो आज भी हर धड़कन का हिस्सा है, लेकिन खुद वह गुमनामी के अंधेरे में चले गए।

फिल्म के अन्य यादगार गीत

'मैंने प्यार किया' में कुल 11 गाने थे। 'दिल दीवाना' को छोड़कर बाकी हिट गाने जैसे 'आजा शाम होने आई', 'मेरे रंग में रंगने वाली' और 'कबूतर जा जा जा' को देव कोहली ने लिखा था। वहीं फिल्म के संगीतकार रामलक्ष्मण थे। 'कहे तोहसे सजना' में शारदा सिन्हा की आवाज ने लोक संगीत का जादू बिखेरा था।

आज भी जब सुमन (भाग्यश्री) को पीली साड़ी में और प्रेम (सलमान) को उनके सिग्नेचर अंदाज में इस गाने पर देखते हैं, तो असद भोपाली की कलम का जादू साफ महसूस होता है।