गले की खराश और कफ मिटाने वाली मुलेठी कहीं शरीर को अंदर से नुकसान तो नहीं पहुंचा रही
भारतीय रसोई और पारंपरिक घरेलू नुस्खों की जब भी बात आती है, तो मुलेठी (Licorice Root) का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. सर्दियों के दिनों में या गले में खराश, खांसी और जुकाम होने पर दादी-नानी के नुस्खों के तौर पर मुलेठी की लकड़ी को चूसना या उसकी चाय बनाकर पीना हमारे यहां बेहद आम बात है. आयुर्वेद में मुलेठी को एक बेहद गुणकारी औषधि माना गया है, जो पाचन क्रिया को ठीक करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और गले की समस्याओं से तुरंत राहत दिलाने का काम करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मुलेठी को आप पूरी तरह सुरक्षित समझकर रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल कर रहे हैं, वह अत्यधिक सेवन करने पर आपके शरीर को अंदर से गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकती है? आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है कि मुलेठी में पाया जाने वाला 'ग्लािसराइज़िन' (Glycyrrhizin) नामक सक्रिय यौगिक यदि जरूरत से ज्यादा मात्रा में शरीर के अंदर जाए, तो यह ब्लड प्रेशर बढ़ाने से लेकर शरीर में पानी और नमक के असंतुलन जैसी कई खतरनाक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं कि मुलेठी के सेवन के क्या फायदे हैं और किन परिस्थितियों में यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है.
आयुर्वेद में मुलेठी के अद्भुत गुण और पारंपरिक उपयोग का महत्व
प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में मुलेठी को 'यमधु' या मीठी जड़ के रूप में जाना जाता है, जिसकी तासीर ठंडी होती है और यह वात तथा पित्त दोष को शांत करने में मदद करती है. जब किसी व्यक्ति को गले में खराश, स्वरभंग (आवाज बैठना), सूखी खांसी या फेफड़ों में जमा कफ की समस्या होती है, तो मुलेठी चबाने से गले की मांसपेशियों को तुरंत राहत मिलती है और कफ पतला होकर बाहर निकल जाता है. इसके अलावा, पेट की गैस, एसिडिटी और अल्सर जैसी समस्याओं में भी मुलेठी के चूर्ण का सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है. प्राकृतिक मिठास से भरपूर होने के कारण यह स्वाद में अच्छी लगती है और बिना किसी केमिकल के प्राकृतिक रूप से शरीर की कई छोटी-मोटी परेशानियों को दूर करने की क्षमता रखती है, यही वजह है कि लोग बिना किसी डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन धड़ल्ले से करते हैं.
अत्यधिक मुलेठी खाने से शरीर को हो सकते हैं ये गंभीर नुकसान
मुलेठी के औषधीय गुणों से कोई इंकार नहीं कर सकता, लेकिन किसी भी चीज की अति नुकसानदायक होती है, और यही नियम मुलेठी पर भी पूरी तरह लागू होता है. यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक या प्रतिदिन बहुत अधिक मात्रा में मुलेठी का सेवन करता है, तो उसमें गंभीर साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं. मुलेठी में मौजूद ग्लाइसीराइज़िन हमारे शरीर में पोटेशियम के स्तर को तेजी से गिरा देता है और सोडियम (नमक) को रोककर रखता है, जिससे शरीर में पानी और फ्लूइड रिटेंशन की समस्या बढ़ जाती है. पोटेशियम की कमी (Hypokalemia) होने के कारण मांसपेशियों में कमजोरी, अत्यधिक थकान, दिल की धड़कन का अनियमित होना और चक्कर आने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जो शरीर को अंदर से कमजोर कर देती हैं.
हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए मुलेठी बन सकती है एक बड़ा खतरा
जिन लोगों को पहले से ही उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) या दिल से जुड़ी कोई बीमारी है, उनके लिए मुलेठी का नियमित और अत्यधिक सेवन किसी जहर से कम नहीं है. मेडिकल रिसर्च और क्लिनिकल स्टडीज यह साबित करती हैं कि मुलेठी का सेवन करने से शरीर में ब्लड प्रेशर का स्तर खतरनाक हद तक बढ़ सकता है, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं पर सीधा दबाव डालती है. कई मामलों में डॉक्टरों ने ऐसे मरीजों का इलाज किया है जो बिना सोचे-समझे रोजाना मुलेठी की चाय या कैंडीज का सेवन कर रहे थे और अचानक उनका बीपी अनियंत्रित हो गया. इसलिए हाई बीपी, किडनी के रोगियों या गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना मुलेठी या इससे बने उत्पादों का सेवन करने से पूरी तरह बचना चाहिए.
एक दिन में कितनी मात्रा में मुलेठी का सेवन है सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पोषण वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि आप मुलेठी के फायदों का लाभ उठाना चाहते हैं और किसी भी दुष्प्रभाव से बचना चाहते हैं, तो इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक दिन में कुछ मिलीग्राम से ज्यादा ग्लाइसीराइज़िन का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता है. यदि आप गले की खराश दूर करने के लिए कभी-कभार मुलेठी का टुकड़ा चूस लेते हैं या हफ्ते में एक-दो बार इसकी चाय पीते हैं, तो इससे कोई नुकसान नहीं होता है. लेकिन इसे अपनी दैनिक आदत बना लेना और हर रोज मुलेठी का काढ़ा पीना आपके शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है. यदि आप किसी पुरानी बीमारी की दवा ले रहे हैं, तो मुलेठी खाने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें.