टिकट चाहिए तो जाति बताओ, पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस का चौंकाने वाला फॉर्मूला
राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। निकाय चुनावों में ऑनलाइन टिकट फॉर्मूले की आजमाइश के बाद अब पार्टी ने जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के टिकट वितरण को भी पूरी तरह डिजिटल कर दिया है।
QR कोड से होगा टिकट का दावा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक आधिकारिक क्यूआर कोड जारी किया है, जिसके माध्यम से चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों को अपनी दावेदारी ऑनलाइन दर्ज करानी होगी। संगठन स्तर पर इन आवेदनों की सख्त जांच-परख के बाद ही चुनावी मैदान में अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
इस डिजिटल आवेदन प्रक्रिया में पार्टी का सबसे बड़ा फोकस चुनावी क्षेत्र के जातिगत ताने-बाने पर है। पंचायत चुनावों में जातिगत समीकरणों की निर्णायक भूमिका को देखते हुए हर दावेदार से उसके वार्ड का पूरा सामाजिक डाटा मांगा गया है। आवेदक को अपने वार्ड में मौजूद विभिन्न जातियों के मतदाताओं का अलग-अलग आंकड़ा देने के साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसके खुद के समाज के कुल कितने वोटर उस वार्ड में निवासरत हैं। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक संतुलन और जातिगत पकड़ ही जीत की सबसे मजबूत गारंटी तय करती है।
सिर्फ जमीनी प्रभाव ही नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की डिजिटल उपस्थिति भी इस बार टिकट वितरण की अहम कसौटी बनेगी। आवेदन फॉर्म में दावेदारों से उनके सभी सोशल मीडिया हैंडल्स के लिंक मांगे गए हैं, ताकि पार्टी नेतृत्व उनकी वास्तविक सक्रियता का ऑडिट कर सके। नेताओं को यह बताना अनिवार्य किया गया है कि वे सोशल प्लेटफॉर्म्स पर कितने सक्रिय हैं, उन्होंने संगठन के पक्ष में कितनी पोस्ट की हैं, मौजूदा सरकार की नाकामियों को कितनी बार मुखरता से उठाया है और अपने इलाके में पार्टी के धरना-प्रदर्शनों में उनकी भागीदारी किस स्तर की रही है।
पंचायत चुनाव के दावेदारों की ऑनलाइन कुंडली खंगालेगी कांग्रेस
गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा जारी किए गए इस फॉर्म में दावेदार का नाम, वोटर आईडी, जन्मतिथि, पिता या पति का नाम, स्थायी पता, धर्म, वर्ग, जाति, पेशा और वॉट्सएप नंबर जैसी बुनियादी जानकारियां दर्ज करना जरूरी है। इसके अलावा राजनीतिक पृष्ठभूमि को परखने के लिए यह भी पूछा गया है कि आवेदक कितने वर्षों से कांग्रेस से जुड़ा है, संगठन में उसने किन-किन पदों की जिम्मेदारी संभाली है और उसकी राजनीतिक यात्रा क्या रही है। परिवार के किसी सदस्य का चुनावी इतिहास और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) से जुड़ाव का विवरण भी आवेदन का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।