पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के बकाये DA पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव को फिर हाजिर होने का आदेश
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और उसके बकाये एरियर के भुगतान को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख सख्त हो गया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव से सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) की मौजूदा स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई कल निर्धारित करते हुए मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से दोबारा पेश होने के आदेश दिए हैं।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से राज्य के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए। इससे पहले अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा था कि यदि पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई शुरू नहीं करवा सकती, तो हाईकोर्ट खुद इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगा। इसी के चलते पिछली तारीख पर अदालत ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।
पूरा विवाद 6वें पंजाब वेतन आयोग (6th Punjab Pay Commission) की सिफारिशों से जुड़ा है, जिसमें केंद्र सरकार के तर्ज पर डीए जारी रखने की सिफारिश स्वीकार की गई थी। इसके बावजूद किश्तें लंबित रहने पर हाईकोर्ट ने 3 अगस्त के अपने आदेश में पंजाब सरकार को 15 दिन के भीतर कर्मचारियों की बकाया डीए किश्तें जारी करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी तय किया था कि तय समय सीमा में भुगतान न होने की स्थिति में बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा, जिसकी गणना मियाद पूरी होने के दिन से वास्तविक भुगतान तक की जाएगी।
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया, लेकिन शीर्ष अदालत में अब तक सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। इधर, भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अगस्त और सितंबर के दौरान पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया था। आंदोलन के बीच सरकार ने 8 सितंबर को हड़ताल पर रहे कर्मचारियों पर ‘नो वर्क, नो पे’ का आदेश लागू कर दिया था। हालांकि, बाद में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के साथ कर्मचारी प्रतिनिधियों की वार्ता के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा की सहमति बनी थी। अब सबकी नजरें कल होने वाली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।