एशियन गेम्स में 44 साल बाद इतिहास रचकर स्वर्ण पदक के साथ रांची लौटीं झारखंड की बेटियां
भारतीय खेल जगत और खासकर महिला हॉकी के इतिहास में जब भी कोई स्वर्णिम अध्याय लिखा जाएगा, तो झारखंड की माटी से ताल्लुक रखने वाली इन होनहार बेटियों का नाम सबसे ऊपर दर्ज होगा. एशियन गेम्स (Asian Games) में भारतीय महिला हॉकी टीम ने लगभग 44 साल के लंबे और संघर्षपूर्ण इंतजार के बाद ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) पर अपना कब्जा जमाया है और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. इस खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाली झारखंड की चार जांबाज बेटियां—भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग—जब स्वर्ण पदक गले में लटकाकर अपने गृह राज्य रांची लौटीं, तो बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का नजारा देखते ही बनता था. पूरे एयरपोर्ट परिसर को पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी, फूल-मालाओं और खेलप्रेमियों के भारी उत्साह से गूंज उठा. अपनों के बीच पहुंची इन चैंपियन खिलाड़ियों का स्वागत करने के लिए खुद राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य गणमान्य लोग एयरपोर्ट व आवास पर मौजूद रहे, जहां उन्होंने इन बेटियों की इस महान उपलब्धि पर उन्हें दिल से गले लगाया और अपनी शुभकामनाएं दीं.
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उमड़ा जनसैलाब और भावुक कर देने वाले पल
रविवार को जब झारखंड की ये चारों 'गोल्डन गर्ल्स' विशेष विमान से रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरीं, तो वहां पहले से मौजूद हजारों खेलप्रेमियों, खेल संघ के पदाधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों ने उनका भव्य स्वागत किया. एयरपोर्ट का पूरा इलाका 'भारत माता की जय' और 'झारखंड की बेटियों की जय' के नारों से गूंज रहा था. हर कोई अपनी इन लाड़लियों की एक झलक पाने के लिए बेताब दिखाई दे रहा था. इस स्वागत समारोह के दौरान सबसे भावुक और मार्मिक पल तब देखने को मिला जब लंबे अर्से से घर से दूर रहकर कठिन परिश्रम कर रही इन बेटियों की मुलाकात अपने माता-पिता और परिजनों से हुई. अपनी बेटियों के गले में चमकता हुआ एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल देखकर माता-पिता की आंखें खुशी के आंसुओं से नम हो गईं. स्थानीय लोगों और पारंपरिक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और वाद्ययंत्रों के साथ एयरपोर्ट के बाहर जश्न मनाया, जिससे यह साबित हो गया कि झारखंड की यह माटी खेल और खिलाड़ियों से कितना गहरा प्रेम करती है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने आवास पर खिलाड़ियों को खिलाई मिठाई और जानी उनकी संघर्ष यात्रा
एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत के बाद इन चारों विजेता खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की, जहां मुख्यमंत्री ने खुद आगे बढ़कर उनका स्वागत किया. मुख्यमंत्री ने बड़े प्यार से सभी खिलाड़ियों को अपने हाथों से लड्डू खिलाए और उन्हें अंगवस्त्र तथा पारंपरिक प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ अनौपचारिक बातचीत करते हुए एशियन गेम्स के दौरान उनके कड़े अभ्यास, विदेशी दौरों पर खान-पान, मैच के दौरान की रणनीतियों और उनके अनुभव के बारे में विस्तार से जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की इन बेटियों ने विपरीत परिस्थितियों से निकलकर जिस दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है, वह देश के करोड़ों युवाओं और विशेषकर ग्रामीण इलाकों की बालिकाओं के लिए एक मिसाल है. इस मुलाकात के दौरान गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी खिलाड़ियों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें नारियल पानी पिलाकर उनकी थकान व स्वास्थ्य की सुधि ली.
फाइनल मुकाबले की रोमांचक दास्तान और ओलंपिक के लिए डायरेक्ट क्वालीफिकेशन
एशियन गेम्स के फाइनल मुकाबले में भारत और चीन के बीच हुआ कड़ा मुकाबला किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं था, जहां भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीनी टीम को 1-0 के रोमांचक अंतर से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. टीम की कप्तान सलीमा टेटे और अन्य खिलाड़ियों ने मैच के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि यह मुकाबला बेहद कड़ा था और अंतिम क्षणों तक चीन की मजबूत टीम के खिलाफ एक गोल की बढ़त को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने अपनी टीम वर्क और एकजुटता से पूरा किया. इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत के साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम ने आगामी लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भी सीधे तौर पर क्वालीफाई कर लिया है. खिलाड़ियों ने कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक पक्का करना है, जिसके लिए वे अपनी कमियों को दूर करके और अधिक मेहनत करेंगी.
झारखंड की खेल प्रतिभाओं के लिए यह स्वर्णिम काल और भविष्य की उम्मीदें
झारखंड के सिमडेगा और अन्य दूर-दराज के आदिवासी बहुल जिलों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचने वाली इन बेटियों की कहानी यह सिखाती है कि यदि असीम प्रतिभा को सही मंच, संसाधन और सरकारी प्रोत्साहन मिल जाए, तो अभाव की हर दीवार को गिराया जा सकता है. राज्य सरकार द्वारा इन खिलाड़ियों को सम्मानित किए जाने और उनके खेल करियर को समर्थन देने के विजन से राज्य के अन्य युवा खिलाड़ियों का भी हौसला बढ़ा है. हॉकी झारखंड और स्थानीय खेल संगठनों ने भी इन खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा है कि यह सफलता आने वाले समय में झारखंड को देश की हॉकी राजधानी के रूप में और अधिक मजबूती से स्थापित करेगी