इस राज्य में रातों-रात कट गए 1 करोड़ वोटर्स के नाम! कहीं इस नई लिस्ट से आपका नाम भी तो गायब नहीं?
कर्नाटक में चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो गई है जिसमें एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। इस नई लिस्ट से करीब 1 करोड़ वोटर्स के नाम हटा दिए गए हैं जिसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 5.54 करोड़ से घटकर 4.55 करोड़ रह गई है।
नए आंकड़ों के अनुसार अब राज्य में 2.25 करोड़ पुरुष और 2.29 करोड़ महिला मतदाता हैं, जिनमें 18 से 19 साल के 6.83 लाख युवा और 85 साल से अधिक उम्र के 3.92 लाख बुजुर्ग वोटर भी शामिल हैं। वोटर लिस्ट में हुई इस भारी कटौती पर सियासी घमासान मच गया है। सीएम डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि सरकार मतदाताओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
दूसरी तरफ कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन इस अभियान को लेकर चुनाव आयोग पर हमलावर हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के साथ ही देशभर में चल रहे इस अभियान पर रोक लगाने की मांग की है।
इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके जवाब में सोमवार को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में 248 पेज का विस्तृत हलफनामा पेश किया है। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने एकमत से संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित एक्ट के तहत लिए हैं। आयोग ने वोटर रजिस्ट्रेशन वाले फॉर्म 6 में किसी भी तरह के बदलाव के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर इस तरह के आरोप लगाने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।